अगर तरबूजा लाल होता तो आप एकदम पहचान जाते न.. इस बार जब हम शोपिंग करने गए तो हमें ये पीला तरबूजा दिखा... स्वाद लाल से थोड़ा अलग. थोड़ा ज्यादा मीठा....
है न मीठा?
Monday, June 14, 2010
Sunday, June 13, 2010
ये मैं क्या खा रहा है? बुझो तो जाने?
बाबा मेरे के लिए ये न्यू न्यू चीज लाये... बताओ तो ज़रा ये में क्या खा रहा है?
आज सफारी वर्ड घूमने जा रहा है.... वाचीच आके बताता है...
आज सफारी वर्ड घूमने जा रहा है.... वाचीच आके बताता है...
Friday, June 11, 2010
आदि को चोट लग गई थी...
गत शनिवार को हम एक पार्टी में गए.... वहाँ बहुत सारे बच्चे आये... सब मुझसे बड़े... हम सब खेल रहे थे...सब भाग रहे थे.. तेज तेज... मैं भी उनके पीछे भागा... पुरी ताकत से... पर ये क्या... मैं धड़ाम... गिर गया.... मुहँ के बल गिरा.... मम्मु बाबा उठाते तब तक तो मुहँ से खून बहने लगा.... मम्मु ने जल्दी से मुझे बर्फ खिलाई.. थोड़ी चीनी खाने को दी... पता चला उपरी होठ पर एक बड़ा जख्म हुआ है... थोड़ी देर मम्मी की गोद में चिपका रहा... फिर ठीक हो गया....
ये देखो... होठ पर चोट लगी है....
ये मुस्कान अगले दिन की है....
अब तो चोट बिलकुल ठीक हो गई है... और इस शनिवार को हम घूमने जा रहे है... बेंग चवाक (Bueng Chawak)और सामचुक मार्केट (Samchuk Market)... वहाँ पर क्या है....ये तो आने पर ही बता पाऊँगा....
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