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Friday, November 21, 2008
तेरे नाम अनेक तू एक ही है!
वैसे तो मेरा ’कागजी’ नाम ’आदित्य रंजन’ है.. और प्यार से मुझे ज्यादातर लोग ’आदि’ ही कहते है..और आपको मेरे नाम की कहानी भी पता है, लेकिन मेरे प्यार के कई नाम और भी है.. कुछ तो पुराने हो गये लेकिन कुछ अभी भी प्रचलन में है.. आप मेरे दोस्त हो न! इसलिये आपको सारे नाम बता देता हूँ..
जन्म के समय मेरा नाक बिल्कुल लाल था.. तो पापा मुझे ’पोपट’ कहते थे.. पापा के साथ-साथ अंशु और अक्षु चाचा भी पोपट बोलने लगे.. लेकिन दादा को ये कतई पसंद नहीं आया.. और पोपट तो अस्पताल से घर आते-आते ही उड गया.. पापा पोपट कहते थे पर दादी के लिये तो मैं लड्डु से कम नहीं था.. तो दादी मुझे ’लाडु’ कहती थी.
प्रीती दीदी से तो मिले है न? जब नानी के घर से दादी के घर आया.. तो दीदी मेरे साथ खेलने आती थी और मुझे ’क्युट-क्युट बेबी’ पुकारती थी.. प्रीती दीदी तो अब भी मुझे ’क्युट-क्युट’ बेबी ही कह कर बुलाती है..
पापा ’सिहं इज किंग’ फिल्म का गाना गाते गाते कब मुझे "आदु सिंह" कहने लग गये है, उनको भी पता नहीं.. पर मुझे खेलता देखते है और मुझे "आदु सिंह" ही कहते है..पापा मुझे आदु सिंह कहते हें तो नाना 'आद राम'.
आपके प्यार से दो नाम और मिले.. उडन तश्तरी अंकल ने दिये.. एक तो ’बबुआ’ और दुसरा ’पलटुराम’.. अब मैं पलटी भी मारता हूँ न इसलिये..
ऋषभ भैया और मेरी बनावट में अनुरंजन चाचा को अंतर नजर आया.. उनको मैं बहुत सोफ्ट लगता हूँ... तो दिपावली पर इस बार मिले तो मेरा नाम ’सोफ्टी ब्वॉय’ रख दिया.. अब तो दादा भी फोन पर ’सोफ्टी ब्वॉय’ के हाल पुछते हैं..
मम्मी के लिये तो मैं क्या क्या हूँ.. इसकी गिनती तो वो भी नहीं कर पायेगी..कभी ’सोना बेटा’ तो कभी मुन्नु, कभी गुट्टु तो कभी प्यारु और कुछ नहीं तो छुटंकु ओर भी जाने क्या क्या ...
चाहे कुछ भी नाम हो हुँ तो मैं प्यारा-प्यारा ’आदि’ ही न?
नोट:- ये ब्लोग लिखते लिखते ’उड़न तश्तरी’ अंकल का फो़न आ गया.... अब तो जल्दी ही उनसे मिलने वाला हूँ मैं..
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