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Friday, November 7, 2008

चारों और किटाणु रख दो..

पलटुराम के पलटने के लिये मैदान बनाने के लिये पापा मम्मी बात कर रहे थे.. एक कमरे को अच्छे से साफ कर आंगन में एक बडा़ सा गद्दा लगा दें.. दिवारों पर मेरे पोस्टर सजा दे.. और गद्दे के चारों और किटाणु रख दे.. अरे ये क्या.. किटाणु?... अरे!! मम्मी की जीभ फिसल गई.. मम्मी कहना चाह रही थी.. कमरे को अच्छे से पोछा लगा किटाणु मुक्त कर, गद्दे के चारों और खिलौने रख दे.. हाँ ये ठीक है.. फालतु टेशन हो गया किटाणु सुनकर..

आया मजा़ किटाणु की बात सुनकर ? चलो अब फोटो देखते है.

सर्दीयां आ गई और मेरी टोपी भी.. नानी लाई है

दोपहर की धूप में.. बैठने की practice और खिलौनो का अवलोकन
दोपहर की नींद में.. देखा मेरा सोने का style?

Friday, September 5, 2008

लिकमाराम जी है कई सा ?

लिकमाराम जी है कई सा ?

आज आपको एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूँ.. ये बात तब कि है जब मैं तीन दिन का था. उन दिनों मैं मम्मी के साथ जोधपुर के कमला नगर अस्पताल में था.. शाम के करीब 4-5 बज रहे थे.. तभी हमारे कमरे का दरवाज़ा खुला और एक प्रौढ़ (जो गल्ती से हमारे कमरे मै आ गये थे) से दिखने वाले सज्जन ने पु्छा "लिकमाराम जी है कई सा ?" सब आशचर्यचकित हो उन्हे ताकने लगे.. तभी पापा मेरी तरफ देख कर बोले "लिकमाराम जी सो रहे है सा..." उन्हे अपनी गल्ती पता चली और सभी लोग ठहाके लगा कर हँसने लगे.. मम्मी तो आज भी ये बात याद कर हसँती है.

लिकमाराम जी है कई सा ?

लिकमाराम जी है कई सा ?

आज आपको एक छोटा-सा क़िस्सा सुनाता हूँ.. यह बात तब की है, जब मैं तीन दिन का था. उन दिनों मैं मम्मी के साथ जोधपुर के कमला नगर अस्पताल में था.. शाम के क़रीब 4-5 बज रहे थे.. तभी हमारे कमरे का दरवाज़ा खुला और एक प्रौढ़ (जो गल्ती से हमारे कमरे में आ गये थे) से दिखने वाले सज्जन ने पूछा, "लिकमाराम जी है कई सा ?" सब आश्चर्यचकित हो उन्हें ताकने लगे.. तभी पापा मेरी तरफ़ देख कर बोले, "लिकमाराम जी सो रहे है सा..." उन्हें अपनी गल्ती पता चली और सभी लोग ठहाके लगा कर हँसने लगे.. मम्मी तो आज भी यह बात याद कर हँसती है.
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