यह कवर पापा ने टेप से लगाया... हट यहां से...
बहुत ध्यान से लगाना पड़ता है सेल..
और भी कई दिलचस्प फोटो है.. देखिये इस फोटो शो में
कैसा लगा इंजिनियर आदि..
एसे बनती है सुजी की खीर
एक चम्मच देशी घी में सुजी अच्छे से सेक लें, सुजी के सिकने पर उसमें दुघ और शक्कर डालकर पका लें.. सुजी की खीर तैयार..
अभी कुछ दिनों से मेरे साथ मम्मी पापा भी सीख रहे हैं . मम्मी, मोना मासी और शिल्पी चाची से बात कर उनके अनुभव भी जानने की कोशिश कर रही है.. पता है, मम्मी के पास एक किताब है.know your child.. मम्मी इस किताब को पढ़ कर भी मुझे समझने की कोशिश कर रही है..मम्मी को ये किताब बहुत यह अच्छी लगती है..
अरे ! क्या बात करते- करते मैं कहां पहुँच गया। चलो फिर से मुद्दे पर आते हैं .. मेरा उपरी आहार दूध से शुरू हुआ. मम्मी ने दूध में शहद और पानी मिलाकर मुझे पिलाना प्रारम्भ किया..कटोरी और चम्मच से.. थोड़ी देर तक तो मैं पीता रहा.. पर मम्मी इतना धीरे-धीरे पिला रही थी कि मैं इंतजार नहीं कर पा रहा था.. और कटोरी-चम्मच को खुद अपने ही हाथ में लेने की जुगत लगाता रहा.. मम्मी के पास बहुत ताकत है.. मैं पहुँच ही नहीं पा रहा था.. मेरा प्रयास जारी था.. आखि़र में जीत मेरी ही हुई.. मम्मी को चम्मच हटा कर मुझे कटोरी से ही दूध पिलाना पडा़.. मैं जो चाहता था..
दूध का यह अनुभव ज्यादा दिन नहीं चला.. मम्मी को पता चला कि केवल दूध की तुलना में लेक्टोज़न देना मेरे लिए ज्यादा गुणकारी होगा.. बताते हैं, इसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल सभी उपयुक्त मात्रा में होते हैं.. फिर क्या था.. मेरे लिए यह भी आ गया.. और मुझे लेक्टोजन पिलाया जाने लगा.. लेकिन कटोरी चम्म्च से नहीं.. मेरा नया sipper आया है.. इसे मैं खुद पकड़ सकता हूँ और अपनी इच्छानुसार दूध (लेक्टोजन) पी सकता हूँ.