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Wednesday, July 22, 2009

स्कोर कार्ड - समीर अंकल : 201*

समीर अंकल से मैं कभी नहीं मिला, पर वो हर रोज मुझसे मिलते है... और बहुत प्यार करते है.. पहली बार समीर अंकल 28 जुलाई के मिले थे..और इतना लगभग एक साल से हम हर रोज मिलते है.. वो रोज मेरे लिये प्यारे प्यारे संदेश छोड़ जाते है.. और देखते देखते ही ये संख्या 200 के पार पहुँच गई..

ये देखिये स्कोर कार्ड.. सबसे ऊपर उडन तश्तरी याने समीर अंकल.. और उनका स्कोर है २०१*


थेंक्यु समीर अंकल!!!
इस अवसर पर ताऊ (समीर अंकल) ने अपनी खास तस्वीर भेजी है.. और साथ में एक प्यारा सा खत भी... आप भी देखिए कितना प्यार से लिखा है उन्होने..

प्रिय आदि,

बहुत दिन हुए, तुमसे सीधे बात नहीं की. बस ब्लॉग पर टिप्पणी से ही बात हो पा रही है. 

अब तो तुम खूब जल्दी जल्दी बड़े हो रहे हो. रोज एक नया करिश्मा दिखाते हो. अच्छा भी लगता है कभी तुमको ज्यादा बदमाशी करता देखकर डर भी जाता हूँ, जैसे जब तुम अलमारी में बंद होने का खेल खेल रहे थे. मगर जब इतने समझदार मम्मी पापा हमेशा ख्याल रख रहे हैं तो डरना कैसा, यही सोच कर सहज हो जाता हूँ.

मेरी बहुत इच्छा थी कि पिछली यात्रा के दौरान तुमसे मिलता और तुम्हें गोद में खिलाता. तुम्हारे साथ मैं भी बच्चा बन जाता. मगर हमेशा सोचा हुआ होता नहीं है.चलो, अगली बार सही, खेलेंगे जरुर तुम्हारे साथ.
तुम्हें ब्लॉग पर लगातार देखने की अब तो ऐसी आदत सी हो गई है कि आदि एक दो दिन नहीं दिखता तो लगने लगता है कि क्या हुआ आदि को? कहीं कुछ तबीयत तो खराब नहीं? फिर तुम दिख जाते हो और मैं खुश हो जाता हूँ. तुमको मालूम है तुम्हारी दादी याने मेरी माँ, जब थीं तो दो तीन मेरा फोन न जाये तो यही सोच कर परेशान हो जाती थी, रोती थी. फिर मैं फोन कर देता था तो खुश हो जाती थी. मैं हँसा करता था. तुम भी हँसते होगे कि कैसे ताऊ हैं बार बार लिखने को कहते हैं, खेलने ही नहीं देते. और आज जब मैं भारत लगाने के लिए फोन उठाता हूँ तो एक बार को तुरंत तुम्हारी दादी की याद आ जाती है, आँख भर आती है. अब सोचता हूँ, काश!! जब तक थी तब मैं रोज फोन करता उसे.

मैं तुमसे रोज तो नहीं मगर जल्दी जल्दी लिखने को तो कह ही सकता हूँ. जब बड़े हो जाओगे तब चिट्ठी लिखने को कहूँगा (अरे हाँ, ईमेल वाली ही :))

बहुत बदमाशी मत करना. मम्मी पापा का ख्याल रखते जाना और खूब प्यार से खेलना. दादी अभी है कि गईं जोधपुर. उनको मेरा चरण स्पर्श कहना.

ढ़ेरों आशीष के साथ
तुम्हारा फैन
समीर अंकल (उड़न तश्तरी अंकल :))

नोट: पापा को मेरी पुरानी तस्वीर चाहिये थी. मिलती ही नहीं. सब भारत में रखी है तो अभी की ताऊ ताई की भेज रहा हूँ. जब थोड़ा बड़े हो जाओ तो पापा के समय की एक फिल्म देखना : कभी खुशी कभी गम...और उसमें रायचन्द याने अमिताभ का घर. इस तस्वीर में पीछे वही है. अपने दोस्तों को बताना तब कि मेरे ताऊ भी अमिताभ से कम नहीं!! हा हा!!



और साथ मे बोलू मोलू खुशाल की तस्वीर भी भेज रहा हूँ. वो भी कह रही हैं कि आदि के साथ खेलना है. :)
पसंद आया !!!



Saturday, July 18, 2009

ये खरगोश

पापा अंजार की ’वेल्सपन’ फ्रेक्ट्री आऊटलेट से ये बाथ गाऊन लाये हैं.. नहाने के मजे तो है ही पर अब नहाने के बाद टॉवल बांध कर बाहर आता हूँ.. देखिये लग रहा हूँ न खरगोश जैसा..





ये दोस्त मदद
कल रामप्यारी मैडम की क्लास में गया था..और देखो इतना मुश्किल होम वर्क मिला है.. एक धमकी के साथ.."अब होमवर्क लिख लिजिये..और करके लाना..अदरवाइज...यु आल विल बी पनिशड...ओके? हां तो आज ईंगलिश की क्लास थी तो गया गया गया. की इंगलिश ट्रांसलेशन करके लाना.."


अब आप बताओ "A", "B" और "C" सिखाई और होम वर्क में ट्रांसलेशन..अब मैं कैसे करु यें.. आपको आता है तो  प्लीज मेरी मदद कर दो..

कैसी लगी ये पोस्ट?


Friday, July 10, 2009

ब्लोगिंग में आदित्य का एक साल

मित्रों,

आज "आदित्य" के इस ब्लोग को एक वर्ष पुरा हुआ.. आपने "आदि" को इसी ब्लोग पर बढ़ते हुये देखा है.. "आदि" कब पलटने लगा (आज तक भाटिया जी उसे पल्टु कहते हैं).. कब खिलौना पकडना सीखा.. कब चीजें पहचाना सीखा.. कब घुटना चलना सीखा.. और कब वो पाँवो पर खड़ा हो गया.."आदि" ने आप सभी का प्यार दुलार पाते हुए ब्लोग की दुनिया में एक साल पुरा कर लिया.. ये है इस सफर के मुख्य माइलस्टोन


जब ये ब्लोग बनाया था तो सोचा था कि ये केवल मित्रों और संबधियों के लिये है.. कुछ पोस्ट के बाद जब मित्रों ने इसे सराहा और कहा कि ये एक अनुठा प्रयोग है और बहुत रोचक है.. तो उत्साहित होकर ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत की मदद से "आदि" को हिन्दी के प्रथम बेबी ब्लोगर के तौर पर आप सभी के मध्य ले आये.. धिरे धिरे आदि इस बड़े  परिवार का नन्हा सदस्य हो गया.. आदि को न केवल ढे़र सारा प्यार मिला बल्कि समय समय पर आदि के लालन पालन से जुड़ी कई महत्तवपूण सुझाव भी मिले.. और हमें एकल परिवार में रहने का अहसास नहीं हुआ.. आप ही का प्यार था कि "आदित्य" के कम समय में काफी लोकप्रियता पाई.
लेखा जोखा
प्रविष्ठियां                      -               235
हिट्स                          -           25,776
देश                             -              90 +
टिप्पणियां                    -             2268
टिप्पणिकर्ता                 -              300+
फि़डबर्नर से पाठक         -             100+
     
रेंक

पेज रेंक (गुगल)           -                     3        
एलक्सा                     -           449,568 (टॉप टेन से तुलना)
चिट्ठाजगत               -                     40
इंडिब्लोग्‍र                  -                     82 (हिन्दी ब्लोग्‍स की रेटींग)

"आदि" के इस सफर में आप सभी का भरपुर प्यार और मार्गदर्शन मिला.. सभी का बहुत आभार और विशेष रुप से उल्लेख करना चाहेगें इन सभी का..


  1. समीर लाल
  2. seema gupta
  3. राज भाटिय़ा
  4. ताऊ रामपुरिया
  5. Ratan Singh Shekhawat
  6. रंजना [रंजू भाटिया]
  7. कुश
  8. डॉ .अनुराग
  9. PD
  10. संगीता पुरी
  11. ज्ञानदत्त पाण्डेय
  12. Shiv Kumar Mishra
  13. विवेक सिंह
  14. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
  15. रावेंद्रकुमार रवि
  16. Nirmla Kapila
  17. अनिल कान्त : 
  18. नीरज गोस्वामी
  19. dhiru singh 
  20. mehek
  21. जाकिर अली "रजनीश"
  22. vineeta
  23. जितेन्द़ भगत
  24. sanjay vyas
  25. Dhiraj Shah
  26. अल्पना वर्मा
  27. मुसाफिर जाट

विश्वास है "आदि" को आपका प्यार आगे भी मिलता रहेगा.. इस ब्लोग में और नवीनता लाने के लिए आपके सुझावों, प्रतिक्रियों का सदैव स्वागत है..
कल से आदि के बारे में और बातें होगी, आज इतना ही!!
पसंद है आदि का ब्लोग


आभार,
अंजु और रंजन

Saturday, July 4, 2009

एसे गया रामप्यारी की क्लास में...

ताऊ ने कल आप सभी को बता तो दिया कि मैं ताऊ कि स्कुल में भर्ती हो गया.. और कल रामप्यारी कि क्लास अटेण्ड कर आया..  लेकिन ताऊ ने ये नहीं बताया कि मैं वहाँ पहुचा कैसे..  पापा और ताऊ कि पोल पट्टी मैं खोल दे रहा हूँ.. हुआ युँ कि मुझे लेने के लिये ताऊ ने अपनी हरियाण नंबर की खुली जिप्सी भेज दी.. अब आप बताओं बच्चे बस में स्कुल जाते हैं, वेन में जाते है, ओटो में जाते है पर ताऊ ने देखो कैसी जिप्सी भेजी..

मैं बहुत चिल्लाया, रोया.. पर देखो कैसे मुझे स्कुल भेज दिया...

मम्मी सुनो..  ताऊ मुझे स्कुल ले जा रहे हैं..


रोने धोने से कुछ नहीं होगा.. अब तो जान ही पडे़गा..

मम्मी ने भी टी शर्ट पहना कर स्कुल भेज दिया..

(ये तस्वीरें २३ मई की है, आदि शाम को घुमते हुए इस जीप में बैठने के लिये मचलने लगा.. तो  उसे इसमें बिठा दिया.. वैसे तो हमेशा तस्विरें घटना के क्रम से ही लगाई जाती है पर आज ये कहानी के लिये इनका क्रम बदल दिया है.. सबसे अतिंम तस्विर सबसे पहले ली गई जब वो जीप में चढा़.. उसके बाद खुद ही उतरने कि फरमाईश भी.. )

कैसी लगी आपको ये कहानी..

Sunday, June 7, 2009

आज सण्डे है, दिन में सोने का डे है..

आज सण्डे है, दिन में सोने का डे है... कोई शरारत नहीं.. कुछ और नहीं...




सोमवार को मिलते हैं




(डॉ अनुराग ने पिछली बार मेरी सोती हुई फोटो देखी तो पापा से  कहा था "क्या कहूँ यार .तुम ये सोते हुए आदि की फोटो मत डाला करो....वर्ना इस कोम्पुटर पे नजर उतारने का जुगाड़ रखो.. " तो आज इस पोस्ट के साथ है नजर उतारने के लिये निंबु मिर्ची और काला टिका..

Thursday, April 2, 2009

आओगे न मेरी बर्थडे पार्टी में?

आज मेरा मंथली बर्थडे है, आज में पूरे ११ महिने का हो गया और अगला मंथली बर्थडे मेरा पहला जन्मदिन होगा..

मंथली बर्थ डे तो घर और ब्लोग पर ही मना लिये और आप ने हर बार प्यार और शुभकामनाऐं दी.. लेकिन पहला जन्मदिन तो धुमधाम से मनाना होगा न? तो उसकी तैयारी भी हो रही है... २ मई २००९ की शाम मेरे घर पर (द्वारका, दिल्ली) एक पार्टी रखी है, और आप सभी को जरुर आना है..





एक महीना पहले बता दिया, कोई बहाना नहीं बनाना..जरुर आना.

आओगे न मेरी बर्थडे पार्टी में? जल्दी से मुझे बताओ aadityaranjan@gmail.com पर मेल कर या फिर टिप्पणी दे कर.

Tuesday, March 31, 2009

मेरा गिफ्ट

मम्मी अपना कार्यक्रम एक दिन प्रिपोन कर रविवार को सुबह ही वापस आ गई.. पता है मम्मी मेरे लिये क्या गिफ्ट लाई है.. ये छोटा सा स्विंमिंग पूल..  रंग बिरंगा पूल..और मेरे लिये तो खेलने का पुरा मैदान


इसमें लगे है दो सींग.. और इन्हे दबाने पर पीं-पीं की आवाज भी आती है.. 


इसमें एक गेट भी है, और उस पर लगे है प्यारे प्यारे सितारे..



मम्मी ये सोच कर लाई थी, की मैं इसमें खेलता रहुगाँ और वो अपना काम करती रहेगी... पर अब मैं इन दीवारों में नहीं रहने वाला..


रविवार को तो पूल का मजा बिना पानी के ही लेना पड़ा, मौसम बदल गया था न, बारिश भी हो रही थी.. जल्द ही  देखुंगा पानी भर के कैसा लगता है..

Thursday, March 26, 2009

मेरे नये केयरटेकर..

वैसे तो मम्मी ही मेरा ध्यान रखती है, मेरे हर जरुरत का ख्याल रखती है तो वो ही मेरी केयरटेकर है.. और जब मम्मी ऑफिस जाती है तो मैं शशि आंटी के पास रहता हूँ तो दिन में आटीं मेरा ध्यान रखती है तो वो भी मेरी केयरटेकर हुई..

लेकिन आज से मुझे कुछ दिनों के लिये नया केयरटेकर मिला है.. मम्मी को ऑफिस के काम से कुछ दिन बाहर गई है और मैं साथ जा नहीं सकता..  नहीं जा तो सकता था पर होटल में मेरी देखभाल कैसे होगी.. घर तो घर है.. और मम्मी को काम भी तो होगा... साथ नहीं जाऊंगा तो रहुगां कहां? मेरे लिये एक नये केयर टेकर की तलाश शुरु हो गई.. और वो आसानी से मिल भी गया.. उनके साथ तो मैं थोडे़ थोडे़ समय के लिये रहता भी हूँ.. तो तय हो गया कि वो ही मेरे नये केयर टेकर होगें.. पर एक दिक्कत थी.. उनको अनुभव नहीं था...  पर अनुभव तो काम करने से ही होता है न? फिर क्या था नये केयर टेकर की  ट्रेनिंग शुरु हो गई.. दो-तीन दिन की ट्रेनिंग के बाद केयर टेकर को भी आत्मविश्वास आ गया..  पता चला मेरे नये केयरटेकर कौन है? ये देखो मुझे नहलाने की प्रेक्टिस कर रहे है.. दो दिन में सीख भी गये हैं..


जी हाँ, पापा ही मेरे नये केयर टेकर है.. और इसी प्रेक्टिस ने इन्हे व्यस्त कर रखा है और आप नई पोस्ट नहीं देख पा रहे हैं.. खैर ३-४ दिन पापा के साथ खुब मस्ती करने का प्लान है.. और अगर मैनें वक्त दिया तो आप को भी अपडेट मिलता रहेगा..

Friday, March 20, 2009

छोटे छोटे कबुतर दो..

ज्ञान अंकल के पिल्लों से तो मिले हो न? जैसे उनके पास पिल्ले है वैसे ही मेरे पास कबुतर के बच्चे.. अंकल को बड़ी आसानी हुई कुकुर के बच्चों को पिल्ला कह दिया.. आप बताओ कबुतर के बच्चों को मैं क्या कहूँ? चलो अभी चुजा बोल देते हैं.. नाम में क्या रखा है?

हमारी बालकॉनी में कबुतरी ने दो अण्डे दिये थे.. और अब उनमें से दो प्यारे प्यारे चुजे निकले है, छोटे छोटे से.. मिलना चाहोगे?

वो देखो वो रहे, कोने में..


नहीं दिखे? ठहरों गोदी से उतर कर बताता हूँ.... वो रहे..


अब दिखे? क्या अच्छे से नहीं दिखे.. लो मैं हट जाता हूँ, मुझे तो आप रोज देखते हो...


ये है हमारे प्यारे प्यारे चुजे.. आये पसंद आपको?.

Tuesday, March 17, 2009

शुभ दिन

पापा कुछ दिनों के लिये बाहर गये हैं.. कुछ पोस्ट लिख गये है, जो इस सप्ताह में प्रकाशित होगी, अगर वक्त और इंटरनेट मिला तो आपको जरुर कुछ और मजेदार बातें बतायेगें... अन्यथा फिर एक सप्ताह बाद मिलेगें..



आपका दिन शुभ हो...

scheduled on March 16, 2008

Saturday, March 14, 2009

फलों का शौकीन

फल मुझे बेहद पसंद है.. सेव, केला, पपीता, चीकू और मेरा फेवरेट संतरा.. संतरा तो इतना पसंद है कि आप कभी भी खिला दो.. मम्मी तो मुझे खाना खिलाने के लिये संतरे का सहारा लेती है.. थोडा़ सा संतरा और एक कौर रोटी का.. मम्मी का भी काम हो जाता है और मेरा भी..

फलों का ये ही शौक मुझे किचन तक ले गया..  फिर क्या हुआ? देखिये ये स्लाईड शो


Tuesday, March 10, 2009

होली की शुभकामनाऐं

आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाऐं



कल पापा दिल्ली आ रहे है, मेरे साथ होली खेलने.. असली फोटो कल मिलेगी...

Saturday, March 7, 2009

मम्मी का ध्यान मैं रख लूंगा!!

पापा मम्मी और मुझे जोधपुर जाना था, होली मनाने और चाचा की शादी की तैयारियां करने.. जाने की सभी तैयारियां भी हो चुकी थी..टिकट भी बुक था.. और सामान भी तैयार था.. पर अचानक मम्मी के पास ऑफिस का कुछ जरुरी काम आ गया.. और पता चला वो नहीं जा पायेगी..:) चाचा की शादी में बहुत कम समय बचा है और पापा का जोधपुर जाना जरुरी था.. फिर तय हुआ मम्मी मेरे पास दिल्ली में रहेगी और पापा जोधपुर जायेगें... तो मेरी होली दिल्ली में ही मनेगी... वैसे मम्मी को टेंशन लेने की जरुरत नहीं, मैं हूँ न!



एक और बात आपको पता है न मेरे पासपोर्ट में नाम गलत छप गये थे? और उन्हे वापस भेजना पड़ा था.. आप सभी की शुभकामनाऐं और ब्लोग पर लिखने का असर देखें कल मेरा पासपोर्ट ठीक हो कर भी आ गया.. केवल १० दिन में... बस दो स्टाम्प लग गये गल्ती सुधारने के...:) हुर्रे!!!

Sunday, February 22, 2009

बडे़ लोग भी मिलने आते हैं.

कल मुझसे मिलने CVS अंकल आये, आंटी के साथ.. CVS अंकल मम्मी की ऑफिस मैं वरिष्ठ सलाहकार है.. काफी समय से घर आने का प्लान बना रहे थे.. पर वक्त तय नहीं हो पा रहा था.. आखिर इस सप्ताह वो हमारे घर के नज़दीक किसी काम से आ रहे थे, तो मम्मी ने आंटी से बात कर उन्हे बुला ही लिया..

अंकल-आंटी दोपहर में आये... उनके आने से पहले ही मैं खाना खा चुका था और नींद का कोटा भी पूरा कर चुका था.. ताकि उनके साथ अच्छे से समय बिता सकूँ... वो मेरे लिये उपहार भी लाये.. अच्छे से पैक कर... चमकीली चमकीली पैकिंग मुझे बहुत आकर्षित कर रही थी.. पर मुझसे खुल नहीं रही थी.. आखिर मम्मी ने पैकिंग खोल कर दी.. उसमे से निकला एक सुन्दर खिलौना...  all-in-one...इसमें मेरे पसंद की तीन चीजें है... खाने के लिये stik, मेरे पंसद का धागा, और बजाने के लिये पैड.. है न all-in-one..


इतना अच्छा खिलौना लाने के लिये अंकल-आंटी को थेंक्यु तो बोलना था न, चढ़ गया गोदी में.. प्यार से बात की और अंकल मुझसे "तेलगु" में बात करने लगे..  उनके प्यार की भाषा समझने के लिये तो चहरे के भाव ही काफी थे... अंकल कह रहे थे..."बहुत अच्छा बच्चा"...

और आंटी की सिफारिश से मुझे गाजर का हलवा भी खाने को मिला...

आज का दिन बहुत अच्छा रहा.. शाम को स्नेहल चाचा भी मिलने आये.. मेरे साथ बहुत देर तक खेले.. पर चाचा ये देख कर हैरान थे कि मैं इतनी आसानी से कैसे खाना खा लेता हूँ, इतनी आसानी से कैसे सो जाता हूँ.. मम्मी पापा को तंग नहीं करता..  अब आप ही चाचा को समझाओ...

Wednesday, December 3, 2008

दुविधा

आदि के जन्म के बाद से ही अंजु (आदि की मम्मी) ने ओफि़स से छुट्टी ले रखी थी... लगभग साढे़ आठ माह से.. अंजु के ओफि़स को लेकर काफी दुविधा बनी हुई थी.... अगर अंजु ओफि़स जाती है तो आदि का ख्याल कौन रखेगा..क्या करे क्या नहीं.. काफी समय से सोच विचार चल रहा था..? और फैसले वक्त पर छोडे़ हुए थे.... अंजु लंबा अवकाश ले या फिर आदि को क्रेच में छोडे़... आदि को क्रेच में छोड़ने का विचार ही उदास करने जैसा है.. प्यारे आदि को कैसे किसी के भी पास छोड़ दे.. और कई लोगों से कई तरह के अनुभव भी सुने.. आखिर तय किया कि पता लगाया जाये क्रेच के नाम पर क्या विकल्प है.. लोगों से बात हुई.. गूगल की मदद ली और फिर कुछ जगह चक्कर लगाये.. कुछ ने कहा कि छोटे बच्चों (डेढ़ साल से कम) को नहीं रखते.. और जो कुछ तैयार हुए, वहां कि सफाई और अन्य चीजें देखकर तौबा कर ली.. अब कोई विकल्प नहीं था.. लगभग तय कर लिया था कि अंजु लम्बा अवकाश लेकर आदि का ख्याल रखेगी.....
इसी बीच एक नया विकल्प सामने आया.. पडौ़स की एक आंटी आदि को अपने पा़स रखने को तैयार हो गई.. सभी कुछ ठीक लग रहा है... घर के एकदम पास (बस एक फ्लोर ऊपर).. और घरेलु माहौल.. व्यवसायिकता से कुछ दूर...
सोचा है ये विकल्प आजमाने का... शुरु में सप्ताह में एक या दो दिन कुछ घण्टों के लिये.. और अगर आदि का मन लगता है और आदि अच्छा रहता है.. तो फिर धीरे धीरे...ज्यादा देर के लिये..
बहुत मुश्किल निर्णय है, पर.. क्या करें एकल परिवार में रहतें है.. तो आज आदि आंटी के पास..


Tuesday, November 11, 2008

धडाम...

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी! जानते समझते हुए भी आदि की सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई और आदि सोफे से गिर गया..
रविवार सुबह.. बाहर जाने की जल्दी थी.. पिकुं के यहाँ काफी मेहमान आने को थे.. मैं दुसरे कमरे में था.. और आदि अपनी मम्मी के साथ सुबह का ब्रेकफास्ट कर रहा था.. सोफे पर.. अचानक अंजु को लगा की आदि को प्यास लगी है.. तो वो आदि को सोफा पर लिटा कर पानी लेने चली, एक कदम ही चली कि पीछे से आवाज आई धड़ाम... आदि सोफा से पलट गया और नीचे गिर गया.. अंजु ने जल्दी से आदि को गोद में लिया.. पर आदि तो बहुत जोर से रो रहा था... शुक्र है.. आदि को चोट नहीं लगी.. और थोडी़ देर में दूध पीकर सो गया..
लेकिन ये हमें जगाने के लिये बहुत था.. आदि कि सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई..हमने तय किया कि आदि को पलंग या सोफा पर अकेला नहीं छोडे़गे.. और खेलने के लिये आंगन पर ही लिटाएंगे..

Sorry aadi..

love you..
माँ, पापा

Wednesday, November 5, 2008

दादी के गीत

कल दिन भर कुछ अनमना सा रहा.. मम्मी भी समझ नहीं पा रही थी क्या हुआ.. ह्ल्का सा जुकाम तो था,पर मैं आराम से नहीं था.. पापा शाम को ऑफिस से आये तो भी हर रोज वाली बात नहीं थी..

पापा फिर मुझे घुमाने भी ले गये.. घर से बाहर आकर "पलटुराम" कुछ ठीक हुआ.. बाहर चहल पहल देख थोडा़ मन लगा रहा.. पर वो बात नहीं आई..

घूमकर जब घर पहुंचे तो फिर दादी से बात की.. पता नहीं मम्मी और दादी कि क्या बात हुई पर मम्मी उसके बाद रुई तेल में भीगा कर लाई, उसे मेरे चारों और घुमाया.. फिर उसे जलाया.. और कुछ देर बाद बोली "आदि की बहुत नज़र उतरी है"... अब पता नहीं ’नजर’ थी या कुछ और.. इतने दिनों बाद दिल्ली आया हूँ.. जोधपुर में कितने लोग थे.. जोधपुर की याद भी तो आ सकती है न?

पता है दादी मुझे और "राजस्थानी गीत" सुनाती थी.. इतने दिनों में मैने घुमर, बन्ना और न जाने कितने गीत दादी की गोद में दुबक कर सुने ... और बहुत खुश हुआ..
याद तो आती है. पर अब तो फोन पर ही बात कर लेता हूँ....
दो-तीन दिनों की इस उदासी के बाद आज मन कुछ ठीक हुआ है, और मेरी मस्ती अब धीरे धीरे फिर से परवान चढ़ रही है...

Monday, October 27, 2008

सबसे छोटा होने के कई फ़ायदे हैं !!

जोधपुर से
मैं परिवार में सबसे छोटा हूँ.. और सबसे छोटा होने के कई फ़ायदे हैं !! .. सभी का प्यार दुलार तो मिलता है साथ ही ख़ास मौक़ों पर ख़ास वरीयता.

अब कल की ही बात लो.. चाचा के नये शोरुम का उदघाटन था.. तो फीता काटने मुझे ही बुलाया गया.. वैसे यह काम तो मुझे और ऋषभ भैया को मिल कर करना था.. पर वह तो पहुंचे नहीं.. तो उनका काम भी मुझे ही करना पड़ा.. ऋषभ भैया don't worry मैं अच्छे से करुंगा.

सुबह-सुबह ही मैं तैयार होकर दादा-दादी मे साथ शोरुम पहुँच गया.. मम्मी तैयार नहीं थी तो उनको छोड़ कर आ गया.. आखिर मुझे उदघाटन करना था, मैं कैसे लेट हो सकता था.. पूजा-पाठ हुआ.. प्रसाद मिला और फिर मैंने दादा की गोद में सवार होकर फीता काट दिया..

कैंची है ज़रा ध्यान से

लो काट दिया फीता आपके शोरुम का..
इत्ती बड़ी कुर्सी चाचा की..

वहाँ बहुत सारे लोग मिले..और सभी खुश थे.... और प्रकाश चाचा ने मुझे थोडा़ सा गुलाब जामुन भी खिलाया....

Sunday, October 26, 2008

आपके कमेंट मैं भी देखता हूँ..

आप सभी का प्यार मुझे हमेशा मिलता है.. आप सोचते होगें हम इतनी मेहनत से आदि को कमेंट्स भेजते है पर आदि थोड़े ही देख पाता होगा.. ऐसी बात नहीं है... मैं मेरी पोस्ट और आपके कमेंटस खुब देखता हूँ 

आप सभी का आभार!!!

Monday, October 13, 2008

पापा की कहानी और आदि की good night..

रात को मुझे सुलाने के लिये कभी कभी पापा मुझे कहानी सुनाते है.. मै पापा की गोद में लेटा हुआ प्यार से कहानी सुनता हूँ.. और सुनते सुनते कब नींद आ जाती है पता ही नहीं चलता.. कल रात ऐसा ही हुआ.. पापा की कहानी चलती रही और मेरी नींद.. आप भी देखिये 
"एक जंगल में दो शेर रहते थे. उनके नाम था राम और श्याम.. दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे..हमेशा साथ-साथ रहते थे. साथ साथ शिकार करते, खाते, खेलते.. बहुत ताकतवर थे दोनों..पुरे जंगल में उनका राज चलता था.. सारे जानवर उनसे डरते थे. उसी जंगल में मोनु बंदर रहता था.. मोनु  बहुत शरारती था.. उसको शेरों की दोस्ती से बहुत ईर्ष्या होती थी.. एक दिन उसने तय किया कि वो शेरों की दोस्ती तोड़ के रहेगा..
जल्द ही उसे वो मौका भी मिल गया.. एक दिन राम और श्याम हिरण का शिकार कर के लाये.. शिकार को श्याम के पास छोड़ राम नदी में पानी पीने चला गया... मौका देख मोनु श्याम के पास आया और बोला श्याम जी आप बहुत ताकत वाले है.. आपको ही जंगल का असली राजा होना चाहीये.. देखिये शिकार तो आप करते है.. पर खाने का मजा राम ले लेता है..

श्याम मोनु की बातों में आ गया.. उसने कहा.. तुम सही कहते हो मोनु..मुझे ही जंगल का राजा होना चाहिये.. और उसने हिरण को खाना शुरु कर दिया.. अब मोनु बंदर भाग कर राम के पास गया और बोला.. राम जी.. आज तो आपको पानी से ही पेट भरना पडेगा.. आपका शिकार तो श्याम अकेला ही खा गया है.. कह रहा था मैं जंगल का असली राजा हूँ.. आलसी राम तो केवल मेरा मारा शिकार खाता है..
ये सुन राम को गुस्सा आ गया और तो तुरंत श्याम के पास गया, वहां उसने देखा श्याम हिरन खा रहा था.. ये देख राम, श्याम से लड़ पडा.. दोनों में खुब लडाई हुई और फिर दोनों एक दुसरे को कोसते हुई अलग-अलग रास्तों पर चल पडे़..

अलग होने के बाद दोनों की हालत खराब हो गई.. उनको शिकार मुश्किल से मिलने लगे.. और जंगल में उनका रुतबा भी कम हो गया.. अब जानवर उनसे पहले कि तरह नहीं डरते थे.. ये सब देख चिकुं खरगोश को उन पर दया आ गई.. उसने छानबीन की तो पता चला की ये सब शरारत मोनु की है.. वो राम से मिला और सारी बात बताई.. पहले तो राम को विश्‍वास नहीम हुआ पर चिकुं के जोर देने पर वो मान गया. और दोनों सच्चाई जानने के लिये मोनु बंदर के पास गये.. राम नजदीक झाड़ी में छुप गया और चिकुं मोनु से बातें करने लगा..
चिकुं ने मोनु से कहा तुम बहुत बहादुर हो.. तुमने कैसे एक ही पल में राम और श्याम की दोस्ती तुड़वा दी.. देखो दोनों की क्या हालत हो गई है.. सच में मोनु तुम्हारा जबाब नहीं. ऐसी बाते सुन मोनु भी घमण्ड में आ गया और बोला.. अरे ये कौनसी बड़ी बात है.. वो दोनों तो थे ही मुर्ख.. ये सुन राम झाडियों से निकल गया और उसमे मोनु को दबोच लिया.. 
राम उसे लेकर श्याम के पास गया और सारी बात बताई और कहा की ये शरारात इस मोनु की है.. श्याम ने कहा दोस्त मोनु ने सही कहा हम मुर्ख है जो इसकी बातो मे आकर आपस में लड़ पडे़.. दोनों एक दुसरे के गले मिले और उन्होने चिकुं को धन्यवाद दिया.. और मोनु को जंगल से भगा दिया.. 
इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि हमें दोस्तों पर भरोसा करना चाहिये और किसी की बातों में नहीं आना चाहिये.. अपनी अक्ल लगानी चाहिये.." 
पर ये आदि कंहा गया.. लगता है सो गया है. Good Night
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