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Thursday, November 13, 2008

बच्चा पार्टी

जोधपुर की कुछ बातें आपको बतानी रह गई थी.. जोधपुर में जहाँ भी जाता सभी मुझसे मिलने और बात करने को आतुर रहते थे.. खासकर छोटे.. (आपसे छोटे,मुझसे तो बडे़).. तो बाल दिवस पर ऐसी ही बच्चा पार्टी के साथ कुछ पल...

दिपावली के अगले दिन.. चार्मी भुआ ये यहाँ सभी गये.. ये देखिये सबसे घिरा हुआ..


सभी से अलग अलग नहीं मिल सकता था न? तो मैं बीच में लेट गया और सभी मेरे चारों और.. गुडी़या भुआ, बंटी भुआ, डीपंल भुआ, चार्मी भुआ, अक्षु चाचा,करिश्मा भुआ,अनुरंजन चाचा ओर ऋषभ भैया
१ नवम्बर को पापा के सभी दोस्त लहरिया रिसोर्ट में मिले.. ये देखो सलोनी दीदी के साथ.
सलोनी दीदी
नानी के घर तो बहुत धमाल मचा, बीकानेर से आये इन भाई बहनों के साथ..
नक्षत्र, गुडी़या और कनु दीदी


दादा के यहाँ प्रिती दीदी हमेशा मेरे पास रहती थी.. और मेरे साथ खुब खेलती थी..

और ये है प्रिती दीदी

Sunday, November 2, 2008

आज में छः माह का हो गया...

आज मेरा "मंथली" बर्थडे है.. आज मैं पुरे छः माह का हो गया.. कल सामान्य जाँच के लिये हम डॉक्टर के पास गये.. मेरा वजन अब 7.5 kg हो गया है.. ये देखो मेरे वजन का ग्राफ

हरी लाइन के पास-पास ही मेरा वजन बढ़ रहा है.. सामान्य रुप से..

जोधपुर आकर में अब उल्टा होना सीख गया हूँ.. और सोते समय बिस्तर में घूम जाता हूँ.. मम्मी ढुढती रहती है :)

19 सितंबर को मम्मी का हाथ देख कर घुमने की कोशिश
5 अक्टुबर को चण्डीगढ़ में मम्मी ने करवट से सुलाया तो में पलट गया

एक बात और अब मुझे मेरा नाम कुछ-कुछ समझ आने लगा है... आप "आदि" कहोगे तो आपकी तरफ देख लूगां.. और एक smile मिल जाये तो आपका ’लक’ है :)
जोधपुर की मस्ती आज खत्म होने वाली है, शाम को मण्डोर एक्सप्रे़स से फिर दिल्ली चला जाऊंगा... कुछ बाते और है.. जो दिल्ली जा कर बताऊगा.

Thursday, October 30, 2008

ऋषभ का खिलौना

ऋषभ भैया हालांकि मुझसे थोड़े ही (६ माह) बडे़ है.. पर उनके लिये तो मैं किसी खिलौने से कम नहीं.. भैया जब मस्ती के मुड़ में होते है तो मजे ही मजे.. वो प्यार से मुझे देखते है, स्माइल देते है और छुकर भी देखते है.. हाँ कभी - कभी ज्यादा तेज छुने की कोशिश करते है.. जैसे मैं कोई खिलौना हूँ....पर कोई न कोई तो पास होता ही है..
पुरा घर मेरी और भैया कि किलकारियों से गुँज गया है.. सभी दिन भर के लिये वयस्त है.. मेरे और "ऋषभ बाबु" के लिये..



आज तो मैं नानी के घर हूँ.. अरे वहाँ भी तो धमाल मचानी है..

Wednesday, October 29, 2008

दीपावली पूजन

जोधपुर से..

आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.. और आभार आपके शुभकामना संदेशों के लिए..

दीपावली की शुभकामनाएं
कल तो लक्ष्मी पूजन था... शाम को मम्मी ने मुझे नये कपडे़ पहना कर तैयार कर दिया था.. ऋषभ भैया भी तैयार हो गये.. हाँ उनको तो अनुरंजन चाचा ने नींद में ही तैयार कर दिया.. उनके लिए दादा बहुत सुन्दर जोधपुरी सूट और जूती लाये थे..
दादी की गोद में आरती

लक्ष्मी पूजन पर दादा दादी ने पूजा का थाल तैयार किया और हमने लक्ष्मी पूजा की.. मैं भी आरती की किताब ध्यान से देख कर आरती में अपना योगदान दे रहा था..

घर से पूजा कर हम चाचा के शोरुम गये.. वहां भी तो पूजा करनी थी... ऋषभ भैया तो अभी तक सो ही रहे थे...चाचा के शोरुम में भी सो ही रहे थे... वहां भी पूजा हुई.... पर पूजा करते करते मैं तो थक गया.. और पापा की गोद में सो गया.. लेकिन ऋषभ भैया की नींद तब तक पूरी हो गई.. और पटाखों के मज़े तो उन्होंने ही लिये..
दादा की गोद में ऋषभ भैया

तो ऐसी रही मेरी पहली दिपावली..

दादा दादी और ऋषभ भैया के साथ मेरी मस्ती जोधपुर में चालू है.. जल्दी ही और बातें लेकर आता हूँ..

Saturday, October 25, 2008

मेरी सीट कहाँ है?


दिल्ली केंट रेल्वे स्टेशन परकल मैं पहली बार छुक-छुक गाड़ी में बैठा... दीपावली पर दादा-दादी के पास जा रहा था.. पर पापा को देखो उन्होंने मेरी टिकट ही नहीं बुक करवाई.. कहते है कि ट्रेन में बच्चों की टिकट नहीं होती. अब आप ही बताइये कि बिना टिकट भी कोई ट्रेन में जाता है भला? ख़ैर !मैं बिना टिकट ही स्टेशन की ओर चला.. स्टेशन तक आना कोई नई बात नहीं थी.. वहां तो एक बार पहने भी आ चुका हुँ, पर इस बार मैं छुक-छुक गाड़ी में बैठने वाला था.. स्टेशन पर मैंने बहुत मस्ती की.. जानने वाले से भी और अनजानो से भी.. अनजाने है तो क्या बात करुंगा तभी तो जान पाऊंगा ..

ट्रेन (२४६१ दिल्ली - जोधपुर - मण्डोर एक्सप्रेस) आई पूरी ३० मिनट लेट..हम सही जगह पर ही खड़े थे.. और जल्दी से ट्रेन में चढ़ गये.. अरे! इसमें तो डिब्बे नई डिज़ाइन वाले थे बिल्कुल नये... लेकिन ट्रेन खचाखच भरी हुई थी.... और मेरे लिए कोई सीट भी नहीं थी..भूख भी लग रही थी.. थो़डी़ देर तो देखा फिर तो मैं दूध मांगने लग गया.. दूध पीते-पीते ही मैं मम्मी की गोदी में सो गया...

आस पास में बैठे सभी को लग रहा था कि बच्चा है.. रात में सोने नहीं देगा.. disturb करेगा.. पर वह मुझे नहीं जानते थे...मैं तो disturb करता ही नहीं हूँ.. मैं तो ट्रेन के झूले खा के सो रहा था.. एक बार सोया तो फिर सुबह सात बजे ही उठा..

फिर तो मैं पूरे रंग में था.. सभी के साथ खूब खेला.. हँसा और चिल्लाया भी..

ट्रेन जोधपुर पहुँची 1 घंटा लेट.. दादा स्टेशन पर मेरा इन्तजार ही कर रहे थे.... दादा मुझे लेकर घर आ गये.. और मुझे पूरा घर दिखाया... और biscuit का breakfast भी किया..

अब तो आप जान ही चुकें है कि मैं जोधपुर आ गया हूँ.. और आपको यहीं से जोधपुर के बारे बताऊंगा..

"आप सभी को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं"
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