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Friday, August 21, 2009

दोस्तों का स्वागत नमकिन भुजिया से किजिये..

बिट्टु को जानते हो न? 15 अगस्त की शाम अपने पापा मम्मी के साथ हमारे घर मुझसे मिलने आई थी...  वैसे तो मैं शर्मा रहा था.. दूर दुर जा रहा था पर घर आये मेहमान की कुछ तो खातिर करनी थी.. पर बिट्टु है न बहुत छोटी है.. ज्यादा खाती पीती नहीं है... पर मैने उसे भुजिया खिला दी.. और उसने भी बहुत प्यार से भुजिया खाई..

ये देखो मैं भुजिया खा रहा हूँ.. और बिट्टु के सामने भी एक भुजिया रखा है..

ये लो बिट्टु तुम भी खाओ...

अच्छे से मुँह खोलो...

दे देखो शरारती हँसी.. 

और बिट्टु भी खुश...

पसंद आया...




सूचना
आज अर्पित चाचा का जन्मदिन है और मैं उनका जन्म दिन मनाने चंडीगढ़ जा रहा हूँ.. कुछ दिन वहीं रहूँगा.. और चाचा के साथ खुब मस्ती करूगां..

Wednesday, June 24, 2009

आदित्य - बिट्टु मेरी नई दोस्त

एक नई दोस्त बनी है.. प्यारी बिट्टु.. बिट्टु भी मेरी तरह शशी आंटी के घर आने लगी है.. और हम पुरे दिन धमाचौकडी़ करते है.. ये देखे प्यारी बिट्टु.. बिट्टु अभी ६ माह की है और भाग नहीं सकती... केवल पेट के बल सोती है..


मेरे लिये वो किसी खिलौने से कम नहीं... जैसे दुसरे खिलौनों से खेलता हूँ वैसे ही बिट्टु के साथ भी..

पता नहीं अंकल आंटी क्यों  बिट्टु को मुझसे बचाते रहते हैं.. मैं तो उसे पकडने की कोशिश ही करता हूँ.. कभी हाथ, कभी पैर.. और कभी मुँह..

हम दोनों खुब मस्ती करते है.. बिट्टु के खिलौनो से मैं भी खेलता  हूँ... वैसे आप "भी" की जगह "ही" पढे़ तो भी ठीक है...
आंटी जिस कमरे में बिट्टु को ले जाती है मैं भी उसके पिछे हो लेता हूँ.. ना उसको सोने देता हूँ न खुद ही सोता हूँ..  
बिट्टु के आने से एक प्यारा दोस्त मिल गया है.. मेरी साईज का.. है न?

कैसी लगी मेरी नई दोस्त?



शरारत ऑफ द डे
अंकल के पिछे पिछे किचन में चला गया.. और अपनी नकली हंसी से उन्हे सम्मोहित करने लगा.. अंकल भी मुझे हँसता देख खुश हो गये और मुझसे बात करने लगे.. फिर अचानक उनका ध्यान मेरे से हटा और मैने पलक झपकते  ही टोमेटो केचअप की बोतल उठा ली..... बोलत एक लिटर वाली थी और पूरी भरी हुई थी.. इतनी भारी बोतल मुझसे कैसे उठती... और.. और.. और.. धड़ाम...... ये क्या बोतल गिर कर टुकडे़ टुकडे हो गई.. अंकल ने पलट कर देखा तो मैं हंस रहा था.. आदि इतनी शरारत चोट लग जाती तो?

Thursday, November 13, 2008

बच्चा पार्टी

जोधपुर की कुछ बातें आपको बतानी रह गई थी.. जोधपुर में जहाँ भी जाता सभी मुझसे मिलने और बात करने को आतुर रहते थे.. खासकर छोटे.. (आपसे छोटे,मुझसे तो बडे़).. तो बाल दिवस पर ऐसी ही बच्चा पार्टी के साथ कुछ पल...

दिपावली के अगले दिन.. चार्मी भुआ ये यहाँ सभी गये.. ये देखिये सबसे घिरा हुआ..


सभी से अलग अलग नहीं मिल सकता था न? तो मैं बीच में लेट गया और सभी मेरे चारों और.. गुडी़या भुआ, बंटी भुआ, डीपंल भुआ, चार्मी भुआ, अक्षु चाचा,करिश्मा भुआ,अनुरंजन चाचा ओर ऋषभ भैया
१ नवम्बर को पापा के सभी दोस्त लहरिया रिसोर्ट में मिले.. ये देखो सलोनी दीदी के साथ.
सलोनी दीदी
नानी के घर तो बहुत धमाल मचा, बीकानेर से आये इन भाई बहनों के साथ..
नक्षत्र, गुडी़या और कनु दीदी


दादा के यहाँ प्रिती दीदी हमेशा मेरे पास रहती थी.. और मेरे साथ खुब खेलती थी..

और ये है प्रिती दीदी

Tuesday, July 15, 2008

मै परी से मिला..



रविवार का दिन था, बहुत सुकुन से गुजरा.. सुबह मालिश हुई.. नहाया और सोया.. आज पापा ने मेरे नाखुन काटने की कोशीश की, पुरे दिन की मश्कत के बाद केवल दो नाखुन काट पाये.. मुझे पता है जब मे सो रहा हूँगा तो कोइ मेरे नाखुन काट देगा।




शाम में परी दीदी मिलने आई। मैं सो रहा था पर जैसे ही दीदी आई मे उठ गया। दीदी मुझे देख कर बहूत खुश हुई.. दीदी अपने मम्मी-पापा के साथ आई थी..परी की मम्मी ने मेरी बहुत कसरत करवाई.. वो कह रही थी मुझे "रफ - टफ" होना चाहीये.. परी मेरे साथ बहुत खेल रही थी। और किसी को भी मुझे छुने नहीं दे रही थी।






देर शाम जब मे रोया तो मेरी आखों मे आँसु आये.. मम्मी ने बताया की अब रोने पर मेरी आँखे गीली होती है..

रात को मुझे बहुत मस्ती आ रही थी.. बिल्कुल नींद नही आ रही थी..पापा के साथ खुब देर तक खेलता रहा..
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