Showing posts with label शरारत. Show all posts
Showing posts with label शरारत. Show all posts

Thursday, September 23, 2010

क्रीम पाउडर मल मल के.....

घर में अगर ५ मिनिट भी शान्ति है तो समझ जाइए की आदि "काम" पर है... हर जगह खोज शुरू हो जाती है..  "आदि क्या काम कर रहा होगा?" वैसे जब मम्मी पापा ढूंढते है तो "काम" नहीं कहते.. वो उसकी जगह "बमाशी" कहते है..

इन दिनों मेरी मेहरबानी है क्रीम और पाउडर पर.. बस जब नजर पड़ी तो डिब्बा खाली...

एक दिन (फोटो एक दिन की है, वैसे तो कई डिब्बे काम आ चुके) हाथ लगा मेरा अपना जोनसन बेबी पाउडर...



और फिर हत्थे चढ़ी ये निव्या क्रीम...

ये खूबसूरती ऐसे ही थोड़ी पाई है?

Monday, December 21, 2009

इसी को कहते है.."कलेजा मुंह को आना"

कल मम्मी से वीडियो चेट किया. "स्काइपे पर"... बहुत देर तक मम्मी से बात की.. साथ में चाचा चाची और "भ" भी था.... और आज सुबह मम्मी का फोन आया... तो फिर मम्मी से बात कर ली..

हेलो मम्मु!!








मेरी आवाज आ रही है.. जल्दी आओ!!





शरारत ऑफ द डे
शाम को बाबा अपना खाना लेकर आये.. प्लेट में गरम गरम चावल थे.. मैंने आव देखा न ताव खाना खान करके अपना बायाँ हाथ गरम गरम चावल में दे मारा.. और मेरी रुलाई शुरू.. बाबा एकदम हक्के बक्के.. तुरंत मेरा हाथ नल के नीचे लगाया... फिर हाथ ठन्डे पानी से भरे मग में दाल दिया.. मेरा रोना अब भी बंद नहीं हुआ.. लेकिन बाबा को अब तक समझ आ गया की मेरा हाथ जला नहीं है.. फिर एक गीले नेपकिन में हाथ लपेट कर हम गैलेरी में मेट्रो और भो भो देखने गए... पांच मिनिट बाद वापस आये तो मेरी मुस्कान भी वापस आ गई थी... इसी को कहते है.. "कलेजा मुंह को आना' 

Monday, December 7, 2009

वाह बाबु क्या ठाठ है..

सोफा, कुशन, काजु सब मिल जाये तो... फोटो देखिए और देखिए आची क्या कर रहा है.. कँहा देख रहा हूँ..



एक काजू और उठा लो...


हाथ डब्बे में और नजर.. अरे वो ही तो आपको सोचना है..


इतना मगन.. अरे ये काजू कहाँ चले गए.. लगता है हाथ गलत जगह पड़ गया..


अरे ये ताब ताब कहाँ से आ गई..


पता चला.. ये देखो इस तस्वीर में... बाबू ठाठ से टीवी देख रहा है..



पसंद आया...

Wednesday, December 2, 2009

बाबु ये तो गिरने वाली हरकत है...

टेबल हल्की है और मेरे खेलने के लिये perfect..  जब मुड़ होता है इसे पल्टी मार कर खेलना शुरु.. आदि बाबु एसे दम लगाओगे तो गिर जाओगे.. जरा संभल के मेरे दोस्त..





डांट लगाओ आदि को आज...

Tuesday, November 24, 2009

ये कौन चित्रकार है....

मुझे मिल गई मम्मी की आई लाईनर... चित्रकारी करने के लिये और क्या चाहिये होता है? क्या कहा कैनवास? अरे घर में इतनी सारी जगह है.. और आप कैनवास की बात करते है... देखिये मेरी चित्रकारी का एक नमुना.. ये काम अभी शुरु ही किया है तो क्लेक्शन में ज्यादा आईटम नहीं है.. अभी तो इसे ही निहारिये



ज़रा औजार ठीक कर लूं..


और मम्मी का आदेश हुआ है तो रुई से साफ साफ भी करना पडेगा..


आपके घर की दीवारें सुनी सुनी तो नहीं है? बुला लो मुझे..

Friday, September 25, 2009

लाईट वाली ठंडी अलमारी

एक दिन मम्मी लाईट वाली अलमारी साफ कर रही थी... अरे वही अलमारी जो ठण्डी भी होती है....मम्मी ने उसका सारा सामान बाहर निकाल कर साफ करने रख दिया.. और मैं... मैं मौका देख उस अलमारी में घुस गया..  बड़ा मजा आया उसमें..
















आप गये हो कभी ऐसी अलमारी में... ट्राई करो..

कैसा लगा!

Friday, September 18, 2009

मेरी बदमाशियाँ

चंद नमुने मेरी बदमाशियों के

















कल पापा आ रहे है.. फिर और मस्ती!!

पसंद आया!!

Wednesday, August 12, 2009

खिलौना मँहगा हो या सस्ता, एक ही दिन में हो खस्ता

अंकल मेरे लिये एक खिलौना लाये.. ये प्यारा सा खिलौना बोलता था.. (जी हाँ ’था’) हैलो, हैलो, डैडी, डैडी... आई लव यू,.. टिविकंल टिविकंल लिटल स्टार...  मुझे ये खिलौना बहुत पसंद आया.. और दिन भर इसे लेकर घुमता था... ये बजता रहता.. डांस करता रहता और मैं खुश होकर उसे देखता रहता..
ये देखे राखी वाले दिन ये खिलौना कैसा दिखता था..


देखो कितने प्यार से खेलता था इससे...


और अब देखो क्या हालत है इसकी...

विवेक अंकल ने कहा था "खिलौना मँहगा हो या सस्ता, एक ही दिन में हो खस्ता"

तो उनके कहे अनुसार इसकी हालत तो आप देख ही रहे है.. अब ये आवाज नहीं करता.. डांस नहीं करता.. पर मुझे तो डांस देखना होता है न?

तो मैं इसे लेकर पापा मम्मी के पास पहुँच जाता हूँ और वो इसे डांस करवा कर और गाकर मेरा मन बहलाते हैं..

कैसे लगी मेरी ये शरारत?

Friday, August 7, 2009

खुरापातियाँ

चंद नमुने मेरी खुरापातों के..

  1. विक्की चाचा के बाइक की चाबी बालकॉनी में जाकर कपडे़ सुखाने वाली चिटकनी के डिब्बे में डाल दी.. चाचा हैरान परेशान पुरे घर में ढुढ़ते रहे.. बहुत मुश्किल से चाबी मिली.. पर चाचा बहुत अच्छे है बोले कि "गलती मेरी ही है.. चाबी मैने ही तो दी थी"
  2. आजकल आप मेरे ब्लोग पर फोटो कम देख रहे हो न? मेरी नई शरारतें भी नहीं पता चल रही न? पता है क्यों.. आजकल मैने केमरे पर हाथ साफ करना शुरु कर दिया है.. जैसे ही कैमरा दिखता है सारे काम छोड़ उस और लपक लेता हूँ.. और तो और मैने केमरा ऑन ऑफ करना भी सीख लिया.. जब मौका मिले कैमरा ले लेता हूँ.. मुझे पसंद है कैमरे के शटर का खुलना और बंद होना.. पापा हैरान है और कोई उपाय नहीं सूझ रहा.. आप मदद कर सकें तो जरुर बताना..
  3. बाहर जाने की तलब.. मुझे अच्छा लगता है कि हर कोई मुझे लेकर बाहर घूमता रहे.. इसलिये मैं मौके तलाशता रहता हूँ.. सबसे अच्छा मौका होता है जब पापा बाहर जाते है.. आप सोचोगे कि मुझे पता कैसे चलता है कि वो बाहर जाने वाले है.. बहुत आसान है जब वो तैयार होकर शर्ट/टिशर्ट पहने है तो मैं समझ जाता हूँ.. और कई बार तो खुद ही शर्ट लाकर दे देता हूँ.. "अब चलो".. कल तो बहुत मजेदार बात हुई.. पापा तैयार हो कर खडे़ थे  पर मै तो नहा कर आया ही था.. पापा को तैयार देखा तो ’हलकान’ मचा दी.. आखिर पापा ने शर्ट उतार मुझे भरोसा दिलाया कि ’बेटे तुझे लकेर ही जाऊगाँ’ तब जाकर तैयार हुआ..

लगता है न कि मैं बड़ा हो गया हूँ... वैसे मैम को मत बताना वरना वो मुझे भी पनिश कर देगी समीर बाबा के साथ..
मजा आया?


Wednesday, July 29, 2009

ट्रेन की पटरी क्यों उखाड़ रहे हो भाई!!

नैनो के साथ मेरे लिये एक ट्रेन भी आई थी.. अंकल ने विशेष सिफारिश की भी पापा से..  उनका कहना था "आदि जुडे़ हुए डिब्बे और चलती ट्रेन देख बहुत खुश होगा.." एसी सिफारिश के बाद पापा को ट्रेन लानी ही थी..
  
छोटे छोटे डिब्बे चलते देख पहले तो मैं बहुत खुश हुआ.. फिर इच्छा हुई की उठा कर देखुँ..

तो इंजन तो साइड कर एक डिब्बा उठा लिया.. चलती ट्रेन से..

फिर खेल शुरु हो गया.. पापा ट्रेन चलाते और मैं डिब्बे उठाता...

और इस बार तो बड़ा हाथ मारा.. इंजन उठा लिया..


एसे ही खेल चल रहा था.. पर ’you know i want something more'

तो इसलिये हमने पटरी ही उखाड़ दी..



पटरी उखाड़ कर जी नहीं भरा.. तो उसकी माला बना डाली..


हा हा हा..

पसंद आई ये शरारत..

Sunday, July 26, 2009

महाबली होगा पर मुझसे बड़ा तो नहीं..

एक महाबली मिला था.. कह रहा था मैं बहुत ताकतवर हूँ.. पर जब मुझसे सामना हुआ तो बेचारे का क्या हाल हुआ खुद देख लो..


हो गया न इसका बुरा हाल.. और किसी को अपने बारे में खुशफहमी हो तो सामने आये.. ये है मेरी बॉडी..


(नजर बचा कर आदि कल एक सेल चबा गया.. जब तक पता चला उसकी हालत खस्ता थी.. आप देख रहे है.. शुक्र है वक्त पर पता चल गया और उसकी और आदि की हालत और खराब होने से बच गई.. )..

आदि को बॉडी दिखाना सिखाया है.. पूरा तो नहीं सिखा पर जब कहते है "आदि बॉडी दिखा.. तो एक हाथ फोटो में दिखाये जैसे कर खडा़ हो जाता है...:)

पसंद आया!!




सुचना
पापा एक सप्ताह के लिये बाहर जा रहे हैं...  आपके बताने के लिये काफी कहानियाँ उन्हे देकर भेज रहा हूँ..  उनको वक्त और इंटरनेट मिला तो जरुर नई बातें बताऐगें.. 

Saturday, July 25, 2009

चेयर + मोबाइल + आदि = खेल

खेलने के लिये नये खिलौनो और नये आईडिया चाहिये होते है.. और ये सब मुझे ही इज़ाद करने पड़ते है..
ये देखो एक चेयर और एक मोबाइल.. और चेयर को पकड़ने के लिये बनी जगह.. और मेरा खेल शुरु...

जगह का मुआयना तो हो गया.. अब लाता हूँ मोबाइल... नजर ’मछली की आँख’ पर


ये गया मोबाइल...
और ये देखो.. बिल्कुल अच्छे से पहुँचा दिया..

और धड़ाम.. मोबाइल.. उस पार..
तालियाँ, तालियाँ, तालियाँ!!

कैसा लगा..


Related Posts with Thumbnails