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Friday, December 18, 2009

आदि चला ''हट'' में..

पापा "ओ (ऑरेंज)" और यम यम देकर किचन में चले गए.. कुछ देर बाद आकार देखा तो आदि गायब.. पापा ने आवाज लगाईं "आदि.." और हट में से आवाज आई "क्या".. अरे आदि तो अपनी हट में चला गया.



पर आदि हट से बाहर क्यों आ रहे हो?


देखो.. पापा ने फोटो लेने के चक्कर में मेरे "हट" का पर्दा ऊपर कर दिया..  ठीक करना पड़ेगा..


अब चलो फिर से हट में..


अब आयेगा मजा खाने का..


और खाने के साथ ताब ताब पढाने की अदा..


पसंद आया....

Saturday, October 31, 2009

त्या....

लुका छिपी मेरा प्रिय खेल है.. आप कहीं भी छुप जाओ.. और बुलाओ आदि "मैं कहाँ हुं और आदि तैयार आपको ढूढने के लिए.. और फिर मिलाने पर ख़ुशी से "त्या...." ढूढने में मजा है ही पर हमेशा में ही थोड़े ढूढता रहूंगा... मौका मिलने पर मैं भी छुप जाउगां और फिर आपकी बारी होगी ढूढने की..

तो एक बार में छुप गया अपनी हट में..
और बाकी का किस्सा इन तस्वीरों में...


खिड़की से मम्मी झांक रही है..


और ये मेरा प्यारा सा "त्या...."


फिर छुपाने की बारी...


और ये तांका झांकी..


और फिर प्यारा सा.. "त्या...."


देखें अब कौन आ रहा हे?


त्या........


बस भाई बहुत हुआ.. कल मिलते हें..


(तस्वीरें १५ अगस्त की)
पसंद आया? खेलोगे मेरे साथ.. त्या..

Saturday, July 25, 2009

चेयर + मोबाइल + आदि = खेल

खेलने के लिये नये खिलौनो और नये आईडिया चाहिये होते है.. और ये सब मुझे ही इज़ाद करने पड़ते है..
ये देखो एक चेयर और एक मोबाइल.. और चेयर को पकड़ने के लिये बनी जगह.. और मेरा खेल शुरु...

जगह का मुआयना तो हो गया.. अब लाता हूँ मोबाइल... नजर ’मछली की आँख’ पर


ये गया मोबाइल...
और ये देखो.. बिल्कुल अच्छे से पहुँचा दिया..

और धड़ाम.. मोबाइल.. उस पार..
तालियाँ, तालियाँ, तालियाँ!!

कैसा लगा..


Thursday, July 16, 2009

आँख मिचौनी - दादी के साथ

दादी के साथ आँख मिचौनी का खेल... ये तस्विरें खुद कहेंगी पुरी कहानी..











पसंद आया?

Monday, June 22, 2009

आदित्य - सफाई पसंद..

मैं नकल करने में उस्ताद हूँ.. कान की बड़ इस्तेमाल  करते देखा तो बड़ कान में.. टुथ ब्रश इस्तेमाल करते देखा तो वो भी.. अब बारी आई झाडु की.. वैसे तो ये टेरेस पर रखा होता है और मेरी पकड़ में नहीं आता पर कुछ दिनों से चिडिया झाडु के तिनके निकालने लगी तो ये घर के अन्दर आ गया.. छोटी चिडिया से तो बच गया पर... अब मैं क्या बताऊ आप देखिये ये मजेदार चित्र कथा..





Wednesday, May 27, 2009

खुद ही छुपा लो.. खुद ही ढुढ लो..

आदि नये नये खेल करने लगा है.. अपनी प्लेट खुद ही छुपाता और फिर उसे ढुढने का प्रयास करता है.... उसकी ये क्रिडायें देख सारी थकान छुमंतर हो जाती है..

ये देखो मेरी प्लेट..
और ये हो गई गायब..
जरा देखें तो है कहां?

और निचे देखना होगा...
नहीं मिली... आपने देखी क्या?
कैसी लगी ये शरारत? जरुर बताना... 

Wednesday, February 25, 2009

लो भईया हम अपने पैरो के ऊपर खडे़ हो गये

बुजुर्गों ने,
बुजुर्गों ने, फरमाया की पैरो पे अपने खडे़ होके दिखलाओ,
फिर ये जमाना तुम्हारा है..



जमाने के सुर ताल के साथ चलते चले जाओ
फिर हर तराना तुम्हारा फसाना है


अरे तो लो भईया हम
हम अपने पैरो के ऊपर खडे़ हो गये
और मिला ली है ताल
दबालेगा दांतो तले उंगलिया, लिंया
ये जमाना देखकर अपनी चाल
वाह वाह वाह वाह धन्यवाद...


आग्रह - कल अचानक से मेरे सखा 40 से घट कर 25 हो गये.. पहले तो लगा अरे इतने दोस्त अचानक कहां चले गये..पर शाम होते होते आशीष अंकल ने बताया कि ये ब्लोगर के तकनिकी कारण है और उसका समाधान यहां बताया.. देर रात तक ये संख्या 30 हो गई..  देख लिजिये आप तो मेरे सखा की सुची में हैं न?

मेरे सखा बनने के लिये यहां चटका लगायें

Saturday, November 22, 2008

गोल गोल थाली, गोल गोल रोटी

गुरुवार की शाम मम्मी खाना खाने के बाद थाली पास में रख मुझसे और पापा से बात कर रही थी.. मेरी समझ मे नहीं आ रहा था आखिर ये थाली और रोटी है क्या...फिर क्या था.. चकमा देकर निकल लिया पता लगाने.. आप भी साथ हो लो मेरे इस मिशन में....






इतनी मेहनत से ये रोटी हाथ लगी है....

Monday, September 29, 2008

देखो - देखो भालू आया

ये देखो मेरी भालू वाली ड्रेस

क्या कहा? कंहा है भालू? देखो ये रहा मेरे T-shirt पर.. दिखा ?
अब आपने देख लिया न?..तो मुझे भी देखने दो..मेरे पास तो एक ही तरीका है देखने समझने का...


जब तक खा न लूँ.. मुझे समझ नहीं आता चीज़ क्या है.. पता है ये तो खाने में बिल्कुल आसान है.. और भालू भी गुदगु्दा है.. आराम से पकड़ में आता है..
पर ये क्या अभी तो खाना शुरु ही किया था.. पापा ने ड्रेस चेंज कर दी... ऐसा क्यों किया पापा?
प्यारे पापा फिर से पहना दो please

Monday, September 22, 2008

टेस्ट चेंज करते हैं!

बहुत दिनों से हाथ और खिलोने खाते- खाते बोर हो रहा था. एक दिन पेपर भी टेस्ट करके देख लिया.. लेकिन एक मिशन बहुत दिनों से अधूरा था. चलो आज उसे पूरा करते हैं.


यह देखो पांव आ रहा है न पकड़ में


हाँ ! आ गया पकड़ में

और यह भी गया मुँह में

और आज के लिए यह नया स्वाद.... मिशन complete!!! हु्र्रे...


(सीमा आंटी ! orange कलर के टी शर्ट में यह फोटो आपके लिये)
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