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Sunday, November 1, 2009

ट्रेनिंग ताली बजाने की...

मम्मी मे मुझे ताली बजाना सिखाया था..  कैसे.. खुद देखिये इस विडियो में.. "ये........" वैसे बहुत जोर से मत बजाना हाथ में दर्द होता है..



आपको किसने और कब सिखाया था ताली बजाना.. याद आया?

पसंद है तो बजाईये ताली!!!

Sunday, August 23, 2009

"बी" फॉर बर्थडे और "बी" फॉर बैलून

चंडीगढ़ से,

जैसा कि मैने बताया था मैं चंडीगढ़ आ गया हूँ.. वैसे तो अर्पित चाचा का बर्थडे मनाने आया पर कुछ दिन और यहीं रहुगां.. मम्मी के साथ..  दिल्ली से चंडीगढ़ का सफ़र शानदार रहा.. एक दो किस्से है.. वो बाद में सुनाता हूँ.. आज बात करते है चाचा के बर्थडे की.. Birthday शुरु होता है.. :"B" से और "B" से ही शुरु होता है.. "Balloon".. तो मेरे लिये दोनों का मतलब एक ही हुआ..

चाचा के जन्मदिन की पार्टी में पहुँच सबसे पहले मैने अपनी अंगुली ऊपर कर बोला.."हूँ" और समझने वाले समझ गये कि मुझे क्या चाहिये.. और तुरंत मेरे लिये एक बैलून की व्यवस्था हुई... उसके बाद मुझे क्या चाहिये था.. मेरे लिये तो वो ही बर्थडे पार्टी थी..


पार्टी में प्राची दीदी भी आई थी... एक बैलून उनको भी मिला..

पर मैने तो हल्ला मचा कर उनका बैलून भी ले लिया.. दो बैलून संभालना मेरे लिये कोई मुश्किल काम नहीं था..

और जब खेल कुद कर थक गये तो वहीँ जमीन पर आसन जमा लिया..

वैसे तो जन्मदिन पार्टी पूरी हो गई थी.. पर केक की ओपचारिकता भी तो पूरी करनी थी... नहीं तो चाचा क्या कहते..

पसंद आया!!




नई सीख..
चाचा की पार्टी में एक नई चीज सीखी.. टूथ पिक से खाना.. पार्टी में जब स्नेक्स सर्व हो रहे थे तो मेरी नजर भी उन पर पड़ी.. सबको टूथ पिक से खाते देख हमने भी उसकी फरमाईश कर डाली और खेलते खेलते टूथ पीक से खाना सीख गया.. और पनीर टिक्का खाने के मजे़ लिये सो अलग.. और तो और हमने अपनी नई कला से बर्थडे बॉय यानी ’अर्पित चाचा’ को भी पनीर टिक्का खिला दिया..

Monday, June 8, 2009

हर बात पर ना ना...

खेलते खेलते मैं गर्दन हिलाना सीख गया.. मेरी गर्दन हिलाने की दिशा एक ही है..  और आप की भाषा में इसका मतलब "ना" होता है.. तो कुछ भी बात करो, कोई भी सवाल पुछो मेरा उत्तर तो हमेशा एक ही होता है.. और इसी का मजा सभी अपने हिसाब से लेते रहते हैं.. चाचा की शादी से पहले कपुर आंटी मुझसे रोज पुछा करती थी "आदि,  चाचा की शादी में  जायेगा?" और मेरा जबाब देख कहती "देखो एसे कहीं नहीं  जाना, ये तो हमारे साथ ही मस्त है".. और भी एसे कई किस्से....अब आप बताओ "मैनें एसा तो नहीं कहा था न?"




शरारत ऑफ द डे
शशी आंटी (अरे वही आंटी जहाँ में दिन में रहता हूँ जब पापा मम्मी ऑफिस जाते हैं) के घर से निकलने के लिये ६-७ सीढियां चढ़नी पड़ती है...  गल्ती से घर का दरवाजा खुला रह गया और मैं सीढ़िया चढ़ बाहर चला.. जैसे ही अंकल की नजर मुझ पर पड़ी तो वो मुझे लेन आये.. और फिर क्या था मैं आगे आगे और अंकल पीछे पीछे... मुझे पकड़ना आसान नहीं था...

Thursday, April 9, 2009

क्या-क्या पहचानता हूँ मैं?


बोलता तो नहीं हूँ पर पहचानना सीख रहा हूँ मैं.. अपने सीधे हाथ तर्जनी से इशारा कर बता सकता हूँ... पता है सबसे अच्छे से क्या पहचानता हूँ में? "आदि को"..  हाँ खुद को खुब जानता हूँ मैं.. पुछो जरा "आदि कहाँ है?" तुरंत अपने सीने पर इशारा कर देता हूँ.. खुद को  पहचानने के बाद सबसे अच्छे से जानता हूँ पंखे को.... पुछो कि "फैन कहाँ है?".. मेरी गर्दन तुरंत छत की और हो जाती है और अंगुली ऊपर.. पापा को भी पहचानता हूँ मैं और मम्मी को भी.. कबुतर भी मेरी पहचान सकता हूँ और केट भी.. हाँ मेरे एक सीपर पर केट बनी है.. सीपर गोल-गोल घुमा कर केट खोज ही लेता हूँ..

मेरे लिये तो ये सिख है, पर पापा के लिये खेल.. थोडी़ थोड़ी देर में पुछते रहते है.."आदि ये कहाँ है, आदि वो कहाँ है?".. जब मुड़ होता है तो बता देता हूँ नहीं तो...... गर्दन हिला न कर देता हूँ...


पता है आजकल दिल्ली का  मौसम बदल रहा है, और मैं बदलते मौसम की चपेट में आ गया.. और कुछ नहीं थोड़ा सा वायरल हो गया.. डॉ अंकल ने कहा है कि चार दिन में ठीक हो जाऊंगा.. दो-तीन दिन तो हो गये...बस अब एक दो दिन की बार और है...

Friday, March 6, 2009

आपने कब सिखा था स्विच ऑन करना?

आपको याद है आपके स्विच ऑन-ऑफ करना कब सीखा था? बहुत साल पहले न? अभी भी आता है स्विच ऑन करना या भूल गये? भूल गये तो कोई बात नहीं, मैने अभी नया नया सिखा है आपको भी सिखा देता हुँ..

ये है स्विच बोर्ड..

स्विच ऑन करने के लिये बटन को निचे से प्रेस करें..

इसके लिये अपनी तर्जनी का इस्तेमाल करें..


और उसी अंगुली से ऊपर की और प्रेस करने से स्विच ऑफ भी हो जाता है..
और अगर अंगुली से काम न बने तो फिर दोनों हाथों से कोशिस करें स्विच जरुर ऑन हो जायेगा..
सीख गये न? अगर नहीं सीखे तो कोई बात नहीं.. मुझसे मिलने आना सीखा दुंगा..
(स्विच बोर्ड आदि को कई दिनों से आकर्षित कर रहे थे... बोर्ड को छुने के लिये बेताब रहता था.. जब आदि को बोर्ड के पास ले जाते तो दोनों हाथों से बटन ऑन ऑफ करने की कोशिश करता था... पर कामयाब नही हो पाता... कल शाम सोफा पर मम्मी की गोद में बैठे वो फिर उछल कर स्विच बोर्ड पर छुने की कोशिश करने लगा... अंजु ने उसे ऊपर चढ़ने में मदद की और फिर बाकी किस्सा तो खुद ही बयान कर रहा है - रंजन)
  

Saturday, February 28, 2009

घुटना चाल

लग रहा था कि मैं घुटने से चलूगां ही नहीं सीधे चलना सीखुगां.. चलना सीखाना शुरु भी कर दिया..  लेकिन इससे पहले मैं कि मैं चलू मैनें घुटने से चलना (crawl) भी सीख लिया.. अभी कुछ दिन पहले ही.. अब घर का हर कोना मेरी पहुँच  में है..

Wednesday, February 25, 2009

लो भईया हम अपने पैरो के ऊपर खडे़ हो गये

बुजुर्गों ने,
बुजुर्गों ने, फरमाया की पैरो पे अपने खडे़ होके दिखलाओ,
फिर ये जमाना तुम्हारा है..



जमाने के सुर ताल के साथ चलते चले जाओ
फिर हर तराना तुम्हारा फसाना है


अरे तो लो भईया हम
हम अपने पैरो के ऊपर खडे़ हो गये
और मिला ली है ताल
दबालेगा दांतो तले उंगलिया, लिंया
ये जमाना देखकर अपनी चाल
वाह वाह वाह वाह धन्यवाद...


आग्रह - कल अचानक से मेरे सखा 40 से घट कर 25 हो गये.. पहले तो लगा अरे इतने दोस्त अचानक कहां चले गये..पर शाम होते होते आशीष अंकल ने बताया कि ये ब्लोगर के तकनिकी कारण है और उसका समाधान यहां बताया.. देर रात तक ये संख्या 30 हो गई..  देख लिजिये आप तो मेरे सखा की सुची में हैं न?

मेरे सखा बनने के लिये यहां चटका लगायें

Friday, December 26, 2008

क्या-क्या सीखना पड़ता है!

कल बताया था कि मेरे दांत आ रहे है और अब मैं नयी नयी चीजे़ खाना सीख रहा हू! (देखे अपने दायें कालम में, मेरे नये स्वाद). अब खाना सीखा है तो पोटी करना भी तो सीखना पडे़गा न? मुझे तो एक चेयर काफ़ी पहले ही गिफ्ट में मिल गयी थी, जब में अर्पित, क्षितिज चाचा से मिलने चंडीगढ़ गया था तबसे.. खैर इतने दिनों तो ऐसे ही रखी थी पर अब मैने इस कुर्सी का उपयोग भी शुरु कर दिया है.. अभी तो बस सीख रहा हूँ इस पर बैठना, कभी-कभी थोड़ा डर भी जाता हूँ... पर इसके आगे लगे छल्ले है न मन बहलाने के लिये..


अरे बाबा!! क्या-क्या सीखना पड़ता है यहाँ?

Monday, December 8, 2008

पीछे खिसकना सीख रहा हूँ.

पलटना तो सीख ही गया था.. पर आजकल खिसकना सीख रहा हूँ.. अभी तो हाथ से धक्का लगा कुछ-कुछ पीछे खिसक लेता हूँ..


मैं क्या करू आजकल माहौल ही ऐसा है, पर मेरे लिये तो ये एक नई उपलब्धि है... अब जल्द ही आगे बढ़ने वाला हूँ..
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