जैसा कि मैने बताया था मैं चंडीगढ़ आ गया हूँ.. वैसे तो अर्पित चाचा का बर्थडे मनाने आया पर कुछ दिन और यहीं रहुगां.. मम्मी के साथ.. दिल्ली से चंडीगढ़ का सफ़र शानदार रहा.. एक दो किस्से है.. वो बाद में सुनाता हूँ.. आज बात करते है चाचा के बर्थडे की.. Birthday शुरु होता है.. :"B" से और "B" से ही शुरु होता है.. "Balloon".. तो मेरे लिये दोनों का मतलब एक ही हुआ..
चाचा के जन्मदिन की पार्टी में पहुँच सबसे पहले मैने अपनी अंगुली ऊपर कर बोला.."हूँ" और समझने वाले समझ गये कि मुझे क्या चाहिये.. और तुरंत मेरे लिये एक बैलून की व्यवस्था हुई... उसके बाद मुझे क्या चाहिये था.. मेरे लिये तो वो ही बर्थडे पार्टी थी..
पार्टी में प्राची दीदी भी आई थी... एक बैलून उनको भी मिला..
पर मैने तो हल्ला मचा कर उनका बैलून भी ले लिया.. दो बैलून संभालना मेरे लिये कोई मुश्किल काम नहीं था..
और जब खेल कुद कर थक गये तो वहीँ जमीन पर आसन जमा लिया..
वैसे तो जन्मदिन पार्टी पूरी हो गई थी.. पर केक की ओपचारिकता भी तो पूरी करनी थी... नहीं तो चाचा क्या कहते..
पसंद आया!!
नई सीख.. चाचा की पार्टी में एक नई चीज सीखी.. टूथ पिक से खाना.. पार्टी में जब स्नेक्स सर्व हो रहे थे तो मेरी नजर भी उन पर पड़ी.. सबको टूथ पिक से खाते देख हमने भी उसकी फरमाईश कर डाली और खेलते खेलते टूथ पीक से खाना सीख गया.. और पनीर टिक्का खाने के मजे़ लिये सो अलग.. और तो और हमने अपनी नई कला से बर्थडे बॉय यानी ’अर्पित चाचा’ को भी पनीर टिक्का खिला दिया.. |
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