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Tuesday, August 18, 2009

दादा मेरे बाल बना दो..

वैसे मेरे बाल बनाना कोई आसान काम नहीं है.. कम से कम तीन कंघे तो चाहिये ही..  वो इसलिये कि दो तो मेरे दोनों हाथों में खेलने के लिये.. और एक से आप बाल बनाओ..
जनमाष्टमी की सुबह जब नहा कर आया तो दादा ने सोचा कि आज आदि की चोटी बनाते हैं..  तो मैने भी सोचा चलो आज दादा तो ट्राई करने देते है और शराफत से बाल बनवाने लगा.. और तो और कंघा भी खुद ही दादा को दे दिया..
और दादा मेरे बाल बनाने लग गये..
चारों और से घूम घूम कर बाल बनवाये.. मैनें.
थोड़ा आगे से भी दादा..
एक ’पोनी’ बना दो मेरी,,
बस.. अब मैं भाग रहा हूँ...
पसंद आया दादा पोते का ये खेल!!




Tuesday, October 28, 2008

राशन कार्ड मे नाम आना क्या मुश्किल काम है?

दादा मेरे जन्म के कुछ समय बाद ही एक फार्म ले आये.. मेरा नाम राशन कार्ड में लिखवाने के लिए.. पूरा फार्म
भर कर रख दिया.. नाम को छोड़ कर..ताकि जैसे ही मेरा नाम तय हो और वह तुरन्त फार्म जमा करवा दे... फिर जैसे ही यह तय हुआ कि मैं "आदित्य रंजन" कहलाऊँगा .... और फिर मैं भी राशन कार्ड में दर्ज हो गया.. ज़रुरी दस्तावेज है.. पता नहीं कब काम आ जाये?
मेरा राशन कार्ड

बहुत आसान काम है.. आपका तो राशन कार्ड है न?
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