बडे़ चाव से पासपोर्ट बनवाया था.. स्टुडियों में फोटो खिचवाई.. नन्हें हाथों से अंगुठा लगाया.. सोचा अगर कहीं परदेश जाना हो तो पासपोर्ट तो चहिए न? अगर समीर अंकल कनाडा बुला ले तो, कैसे जाऊगां.. :).. नवम्बर में पासपोर्ट बनवाने दिया था.. इतंजार था बस इसके बन कर आने का.. कुछ दिन पहले आ भी गया.. पर खुशी की कोई बात नहीं.. पता है पासपोर्ट में मेरा और पापा का नाम ही गलत छाप दिया.. अब गलत नाम से मुझे कौन जाने देगा..
देखो न ये पासपोर्ट आफिस वाले एक काम भी ढंग से नहीं कर सकते... खैर पापा कल इसे वापस भेजेगें ठीक करवाने.. देखे कब वापस आता है?