Showing posts with label priya. Show all posts
Showing posts with label priya. Show all posts

Sunday, November 16, 2008

पिछले दिनों..

9 नवंबर को पोलियो रविवार था.. मुझे पोलियो दवा पीने अस्पताल जाना था. लेकिन मैं दवा पीने नहीं गया.. ऐसा नहीं है कि मुझे इसके बारे में नहीं पता था.. पता तो था पर मुझे एक दुसरे जरुरी काम के लिये जाना था.. चाची से मिलने.. नई चाची..  रविवार को पिंकु चाचा का 'रोका' था चाची भी दिल्ली आई थी, अब चाची से मिलना तो जरुरी था न? ये वो ही चाची है जो एक बार मेरे लिये बंदर लाई थी और मैने आपको बताया नहीं था की बंदर कहाँ से मिला, अब 'रोका’ हो गया तो बता सकता हूँ.. चाची बहुत बिजी थी तो ज्यादा बात नहीं की लेकिन थोड़ी देर गोद में जरुर खेला.
चाची जल्दी आना मुझे आपके साथ खेलना है!
प्रिया चाची

पोलीयो की बात करते करते चाची की बात करने लग गया.. रविवार को दवा नहीं पी सोचा बाद में कोई घर आकर पिला देगा..लेकिन पूरे सप्ताह कोई नहीं आया तो कल पापा नजदीक के health center गये और डॉ से बात की, उन्होने भी फोन कर पता लगाया की आदि की सोसाईटी में दवा पिलाने क्यों नहीं गये.. बताया शायद आपके चौकीदार ने नहीं आने दिया होगा.. खैर उन्होने मेरा पता पुछा और कहा जल्द ही किसी को भेजेगें.. पापा चौकीदार को भी हिदायत दी की कोई दवा पिलाने आये तो रोके नहीं.. ये सब कर पापा घर लौटे ही थे कि दरवाजे की घंटी बजी, पता चला आदि को दवा पिलाने आये है.. ये तो चमत्कार हो गया.. मैने तुरंत दवा पी ली आखिर ये तो "दो बुंद जिन्दगी की" है, और मेरी अंगुली पर चुनाव से पहले ही निशान लग गया..

लाल गोले में पोलियो दवा का निशान

एक उदास करने वाली बात, जोधपुर से पुखराज भैया आये थे, मम्मी का हाथ बटानें और मेरे साथ खेलने.. हम दिन भर बहुत खेलते थे और खुब मस्ती करते थे.. मैं उनके साथ बहुत खुश रहता था, लेकिन वो कल रात वापस चले गये.. लेकिन जल्द ही वापस आयेगें मेरे साथ खेलने.. bye-bye भैया!!
Related Posts with Thumbnails