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Sunday, December 21, 2008

भूलना नहीं आज पोलीयो रविवार है!!

आज है २१ दिसम्बर, यानि पोलीयो रविवार.. ५ साल से छोटे सभी बच्चो को आज पोलीयो की दवा पिलाई जाने वाली है.. मैं तो दो बार ये दवा पी चुका हूँ.. पर आज फिर पीने जाऊगां.. कहते है न.. "हर बच्चा, हर बार".
वैसे पिछले दो बार तो मैं बूथ पर नहीं जा पाया.. घर पर ही दवा पी पर आज तो पक्का बूथ पर जाकर दवा पीकर आऊंगा.. वो क्या है अगर कोई भूल गया और घर पर नहीं आ सका या वो जब आये और मैं घर ना मिला.. दोनों ही बातों में नुकसान तो मेरा ही होगा न? ना बाबा मैं तो समय से जाकर खुद ही दवा पीकर आने वाला हूँ..
वैसे बहुत लोग भूल जाते हैं.. अपने वीरू (विरेन्द्र सहवाग) भी भूल गये..अरे टीवी के विज्ञापन में.. खैर उनके बच्चे को तो उनके बाकी साथी बूथ पर ले गये.. आप मत भूल जाना..
मैं तो जा रहा हुँ..पोलीयो की दवा पीने.. आप भी आ रहे हैं न.. नन्हे-मुन्नों को लेकर!!

Sunday, November 16, 2008

पिछले दिनों..

9 नवंबर को पोलियो रविवार था.. मुझे पोलियो दवा पीने अस्पताल जाना था. लेकिन मैं दवा पीने नहीं गया.. ऐसा नहीं है कि मुझे इसके बारे में नहीं पता था.. पता तो था पर मुझे एक दुसरे जरुरी काम के लिये जाना था.. चाची से मिलने.. नई चाची..  रविवार को पिंकु चाचा का 'रोका' था चाची भी दिल्ली आई थी, अब चाची से मिलना तो जरुरी था न? ये वो ही चाची है जो एक बार मेरे लिये बंदर लाई थी और मैने आपको बताया नहीं था की बंदर कहाँ से मिला, अब 'रोका’ हो गया तो बता सकता हूँ.. चाची बहुत बिजी थी तो ज्यादा बात नहीं की लेकिन थोड़ी देर गोद में जरुर खेला.
चाची जल्दी आना मुझे आपके साथ खेलना है!
प्रिया चाची

पोलीयो की बात करते करते चाची की बात करने लग गया.. रविवार को दवा नहीं पी सोचा बाद में कोई घर आकर पिला देगा..लेकिन पूरे सप्ताह कोई नहीं आया तो कल पापा नजदीक के health center गये और डॉ से बात की, उन्होने भी फोन कर पता लगाया की आदि की सोसाईटी में दवा पिलाने क्यों नहीं गये.. बताया शायद आपके चौकीदार ने नहीं आने दिया होगा.. खैर उन्होने मेरा पता पुछा और कहा जल्द ही किसी को भेजेगें.. पापा चौकीदार को भी हिदायत दी की कोई दवा पिलाने आये तो रोके नहीं.. ये सब कर पापा घर लौटे ही थे कि दरवाजे की घंटी बजी, पता चला आदि को दवा पिलाने आये है.. ये तो चमत्कार हो गया.. मैने तुरंत दवा पी ली आखिर ये तो "दो बुंद जिन्दगी की" है, और मेरी अंगुली पर चुनाव से पहले ही निशान लग गया..

लाल गोले में पोलियो दवा का निशान

एक उदास करने वाली बात, जोधपुर से पुखराज भैया आये थे, मम्मी का हाथ बटानें और मेरे साथ खेलने.. हम दिन भर बहुत खेलते थे और खुब मस्ती करते थे.. मैं उनके साथ बहुत खुश रहता था, लेकिन वो कल रात वापस चले गये.. लेकिन जल्द ही वापस आयेगें मेरे साथ खेलने.. bye-bye भैया!!

Monday, August 25, 2008

दो बूँद ज़िंदगी की

आज तो मम्मी ने सुबह-सुबह ही नहला दिया.. कुछ समझ नहीं आया.. इतनी जल्दी क्यों ? अभी तो पापा ऑफ़ीस भी नहीं गये थे... फिर पापा और आदि साथ-साथ क्यों तैयार हो रहे थे ? थोड़ी देर में पता चला कि पापा-मम्मी आदि को लेकर बाहर जा रहे थे.. पर मुझे पता नहीं था कि यह कोई खुश होने की बात नहीं थी।
आदि को फिर से हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था.. आज आदि को टीका लगना था.. मतलब फिर से सुई उईईईई...
पहले तो मेरा वज़न लिया गया, इस बार वज़न था 6.3 kg . पिछले एक महीने में आधा किलो वज़न बढा.. ठीक है न!
आख़िर वह पल आया.. नर्स दीदी इंजेक्शन तैयार कर रही थी.. उफ़ ! फिर से.. मैं पापा की गोदी में दुबक गया और दीदी ने सुई मेरे thigh में लगा दी.. मैं रो पड़ा.. बहुत दर्द हुआ सच में....तब मम्मी ने मुझे गोद ले लिया और चुप कराने कोशीश की... थोड़ी देर में मैं चुप हुआ.. अब नर्स दीदी ने मुझे मीठी दवा पिलाई... इसे ही कहते है...दो बूँद ज़िन्दगी की... इन सब के बाद मेरे टिकाकरण का यह चरण तो पूरा हुआ... अगला टीका तो 5 महीने बाद लगेगा.
लेकिन आज मेरे पाँव में बहुत दर्द है.. मैं बहुत परेशान हूँ.. चिन्ता नहीं करना मैं जल्द ही ठीक हो जाऊँगा ...
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