सागर अंकल मे मेरे लिये बैट बॉल का ये सेट भेजा..
और मेरे खिलौनों कि टोकरी में ये भी जुड़ गये..
ये रही छोटी सी बॉल... कहां भाग रही है?
चल मुँह में... आदि ये गुलाब जामुन नहीं है...
और ये देखे.. ये बड़ी बॉल है.. आदि छुप भी सकता है इसके पीछे..
थेंक्यु सागर अंकल!!!
कैसा लगा मेरा गिफ्ट? पसंद है..मुलाकात सागर नाहर जी से सागर जी से कुछ परिचय तो ब्लोग के जरिये था.. पर एक दिन सागर जी का एक मैसेज फेस बुक पर आया.. वो किसी पुराने दोस्त के बारें में पता करना चाहते थे जो जोधपुर में रहतें है.. खुशकिस्मती से मैं उन्हे जानता था और उनका नंबर सागर जी तक पहुँचा दिया.. और सागर जी अपने दोस्त से करीब २० साल बाद बात कर पाये.. इस बार जब हैदराबाद जाने का प्लान बना तो सागर जी को सुचित कर कहा "हो सके तो मिलते हैं..." सागर जी का जबाब मिला "हो सके तो नहीं पक्का मिलते हैं...." हैदराबाद पहुँच सागर जी संपर्क किया और उनके जन्मदिन के दिन उनके घर पहुँच गये.. अचानक पहुँचे तो खाली हाथ ही गये कुछ अजिब सा लग रह था पर सागर भाई से बात कर खाली हाथ कि चिन्ता नहीं रही.. भाभी के हाथ की बनी पॉव भाजी खाई... दोनों होनहार बालकों से मिले.. नाहर भाई कि कैफे भी देखी.. ढेर सारी बातें हुई और कुछ चर्चा हिन्दी के चिट्ठों कि भी.. सागर भाई ये नियमित लिखने का का निवेदन कर विदा ली.. खाली हाथ गये थे पर खाली हाथ नहीं आये.. सागर जी ने आदि के लिये ये प्यारा सा खिलौना गिफ्ट किया.. रंजन |
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