कल मौसम बहुत अच्छा हो रहा था, हल्की बरसात के बाद ठण्डी हवाएँ चल रही थी.. तो शाम में हम सभी घूमने चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील गये.. वैसे भी चंडीगढ़ जायें और सु्खना झील न घूमे ऐसा भी होता है क्या?
पूरे रास्ते अर्पित चाचा और क्षितिज चाचा यही बात करते रहे कि आदि का प्राम कौन चलाएगा? बहुत मुश्किल से पापा ने समझौता करवाया..झील पहुँचने पर दोनों चाचा बारी-बारी से मुझे घूमा रहे थे.. और मै मस्ती से घूम रहा था..

अंधेरे में घूमते-घूमते मैं थक गया और अब मेरी इच्छा थी कि मैं गोदी में घूमु..पर यहां तो और भी तगड़ा competition था.. अर्पित चाचा और मामी दादी में..लेकिन मेरी तो मौज थी.. बारी-बारी दोनों की गोदी में घूम रहा था..
सबके साथ घूमते फिरते फिर घर लौटे... हाँ सभी आइसक्रीम खा रहे थे.. पर मुझे नहीं मिली.. पता नहीं मेरा नंबर कब आयेगा?