यह कवर पापा ने टेप से लगाया... हट यहां से...
बहुत ध्यान से लगाना पड़ता है सेल..
और भी कई दिलचस्प फोटो है.. देखिये इस फोटो शो में
कैसा लगा इंजिनियर आदि..
शरारत ऑफ द डे.. कोई मुझे बहला के एक जगह नहीं बिठा सकता.. कल शाम को ये कोशिश पापा ने की.. मेरा मन बाथरुम में जाकर पानी से खेलने का था और पापा मु्झे बार बार वहाँ से लाकर कूछ और खेलने को दे रहे थे... पापा पकड़ कर बाथरुम से लाते, कुछ खेल खिलाते और जैसे ही उनकी नजर हटती मैं दौडते हुए फिर बाथरुम की और.. चार-पाँच बार एसा करने के बाद उनको पक्का यकिन हो गया मैं एसे नहीं मानने वाला.. तो फिर मुझे बाल्टी और पानी के साथ छोड़ दिया... और मुझे मिला मेरा मन पसन्द खेल - आदि हर समय थोडे़ न नहाते है बेटा!!! |
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शरारत ऑफ द डे शाम को घर में मन नहीं लगता.. बाहर घुमने जाना होता है... कल शाम भी एसा ही हुआ.. पापा भी तैयार हो गये.. और बाजार जाने के लिये पापा की गोद में सवार हो गया.. अचानक पापा की नजर कंप्युटर पर पड़ी... देखा तो ब्लोग पर मम्मी का कमेंट था.. पापा मुझे गोदी में लेकर कमेंट पढ़ने लगे.. अब ये मुझे मंजूर नहीं था.. और मौका देख पापा का कान चबा गया... अब पापा के पास कोई विकल्प नहीं था... "आदि एसा करते हैं क्या?" |
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| शरारत ऑफ द डे सोमवार रात को सोते हुऐ आदि की नजर ड्रेसींग टेबल के ऊपर छुपा कर रखे टॉफी (पान पसन्द) के डिब्बे पर पड़ी... डिब्बा देख बाबा ने एक अँगुली उस और कि और हूँ हूँ कर टॉफी की मांग करने लगे, रात के ११ बजे उसे ये टॉफी खिलाने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी.. लिहाजा उसे बहलाने और ध्यान बटाने के तरह के उपाय किये.. पर साहेब का जी तो उसी में अटका था.. और कोई उपाय न देख उसे टॉफी देनी पड़ी, और बाबा रात ११ बजे विजयी मुद्रा में टॉफी खुद छिल कर मुँह में ले स्वाद लेने लगे.. टॉफी का रेपर एक हाथ में ले तब तक उसका स्वाद लेते रहे जब तक वो पुरी मुँह में घुल न गई... और टॉफी खत्म कर ही बाबा सोये.. जय हो!!! |
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आदि बेटा,
ढेर सारा प्यार,
कल मम्मी का फोन आया था.. और मम्मी तेरी बहुत शिकायत कर रही थी.. मम्मी कह रह थी कि तुम एक मिनिट भी शान्त नहीं बैठते, हर पल नई शरारत करते हो.. पूरे समय उन्हे तुम्हारे पिछे घुमना पड़ता है.. मम्मी कहती है कि अब तुम सीढ़ी चढ़ना सीख गये हो.. जब भी मौका मिलता है सीढ़ी चढने उतरने की कोशिश करते हो..
और मम्मी बता रही थी कि तुम दरवाजे पर जा कर खडे़ हो जाते हो और कुण्डी खोलने की कोशिश करते हो.. बाहर घुमने की जिद करते हो.. बेटा मम्मी को कई काम करने होते है.. तुम्हे हर समय बाहर कैसे ले जा सकती है?
और जब मम्मी बाहर ले जाती है तो तुम प्राम से उतरने की कोशिश करते हो, सड़क पर चलने के लिये मचलते हो.. तुम कंकड पत्थर उठाने लगते हो.. क्यों हैरान करते हो इतना..
उडन तश्तरी अंकल ने तुम्हे दो दिन पहले कहा "तूफान मचा डालो!! हालाकान कर दो सबको.." और तुमने मान भी लिया.. बेटा समीर अंकल मजाक कर रहे थे.. चाहो तो पुछ लो..
वैसे सही बताऊ मैं हर पल तुम्हे बहुत मिस कर रहा हूँ, और मन ही मन मम्मी से बहुत इर्ष्या कर रहा हूँ.. कितने अच्छे पल मिस कर रहा हूँ..:) तुम्हारी बाल लिलाऐं मैं कुछ कम क्यों देख पा रहा हूँ.. पर क्या करें, बाहर तो जाना होता है न... जल्द ही दिल्ली आ रहा हूँ फिर हम खुब मस्ती करेगें... बहुत बाहर घूमने जायेगें.. कबुतर देखेगें.. लिफ्ट के बटन दबायेगें.. साईकल चलायेगें.. और वो सब कुछ जो तुम्हे पसंद है..
बहुत प्यार!!
पापा