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Wednesday, July 1, 2009

मेरे इंजिनियर..

इंजिनियरिंग करते-करते एक खिलौना शहीद कर दिया.. अब वो बजता नहीं तो गुस्सा आता था.. आख़िर पापा ने सेल लगा कर उसे टेप से चिपाका दिया.. और वो फिर से आ गया मेरे पास.. मेरे पास आते ही पहली फरमाईश थी टेप हटाने की.. पापा मम्मी ने बहलाया, फुसलाया.. ध्यान बंटाया पर मेरा एक मात्र उद्देश्य उस टेप को हटाना ही था.. आख़िर में मम्मी ने टेप हटा कर खिलौना मेरे हवाले कर दिया.. फिर क्या था कलाकारी शुरू.. उसके सेल बाहर निकाल कर लगाने की भरपूर कोशिश... आप स्वयं ही देख लीजिये..

यह कवर पापा ने टेप से लगाया... हट यहां से...

बहुत ध्यान से लगाना पड़ता है सेल..

देखो ! फिसल कर गिर भी सकता है..

बहुत फिसलता है.. बड़ी मुश्किल से पकड़ में आता है..
ध्यान से देखो.. एक तो लगा भी दिया..अब दूसरा..



मम्मी मेरी मदद कर दो.. !!!! देखते हुए मैं भी सीख ही जाऊंगा..
यह देखो फिर से चलने लगा


लेकिन अब मैं खुद ही ठीक करूंगा ..


ज़रा पंसद तो बताओ?



और भी कई दिलचस्प फोटो है.. देखिये इस फोटो शो में




कैसा लगा इंजिनियर आदि..

Friday, June 19, 2009

आदित्य - ये शेर खुद पिंजरे में आता है...

कभी देखा है एसा शेर जो खुद पिंजरे में आता हो? ये शेर अपनी मर्जी से पिंजरे में आता है और अपनी मर्जी से बाहर भी निकलता है..
शशि आंटी* के घर पर एक बड़ा सा स्टूल है.. बिल्कुल मेरे साईज का.... और घूमते घूमते मुझे इसमें जाना बहुत पसंद है..  और कल तो बहाना भी मिल गया... मेरी बॉल उसमें चली गई थी न?
और इसमें बॉल से खेलने का मजा़ और है... कितना भी मारो वहीं की वहीं रहती है.... पिछे नहीं घूमता पड़ता...   


और ये डण्डा पकड़ खो खो कर सबको डराने के भी मजे है....

बहुत हुआ भाई अब तो बाहर आ जाओ....

लो आ गये!! अपनी मर्जी के मालिक..




(*शशि आंटी - पापा मम्मी जब ऑफिस जाते है तो मैं इनके पास ही रहता हूँ)

Thursday, June 18, 2009

आदित्य - कुछ तो अपनी साईज का ख्याल रख प्यारे!!

कल मेरे खिलौने निकालते हुऐ मम्मी मे ये प्ले हाऊस निकाला... और इससे बनी एक प्यारी सी ’हट’... पर मेरी नजर ’हट’ पर कम इसके डिब्बे पर ज्यादा थी...



और जैसे ही मौका मिला मैं इस डिब्बे को लेकर रफुचक्कर होने की कोशिश करने लगा...



हालाकिं इसकी साईज मुझसे डबल है, पर क्या फर्क पड़ता है.. ताकत तो मुझमें ज्यादा है न

ये देखो!! है न मुझसे बड़ा? और जरा एक नज़र पिछे लगी दिवार घड़ी पर डालो.. सही पहचाना आपने १० बजे हैं... पर ये दिन के नहीं रात के दस बजे है!!! हा हा हा..

और इसे ले जाकर क्या किया.. आप देखिये...  

ये प्यारी सी ’हट’ (फोटो में दिख रही है रेड कलर कि) रितु आंटी  लाई थी मेरे लिये.. मेरा जन्म दिन का उपहार..
थेंक्यु रितु आंटी!!




Friday, June 12, 2009

रसिया को नारि बनाओ री! मोहन को नारि बनाओ री!!

मम्मी मुंबई से केवल आम ही नहीं लाई वो मेरे लिये एक सुन्दर फ्राक भी लाई.. मम्मी बहुत दिनों से सोच रही थी पर उन्हे अब मौका मिला तो ले आई..  फ्राक आई तो मेरे नखरे भी शुरु हो गये और मैने पहनने से मना कर दिया.. पर देखो मम्मी की चालाकी.. मुझे ये बिजली का स्विच पकड़ा कर फ्राक पहना ही दी...
केवल फ्राक पहनने से काम नहीं होने वाला थे.. बिंदी भी तो लगानी होती है..


एक बिन्दी माथे पर लगाने के लिये चाहिये तो दूसरी खेलने के लिये.. देखो पता नहीं कहां गुम हो गई..


और ये देखो मैं तैयार.. मम्मा अब तो बाहर ले जाओ?


कैसी लगी ये प्यारी सी फ्राक आपको?

(शिर्षक पिछली पोस्ट पर आई प्रेमलता जी की टिप्पणी से )

Wednesday, June 10, 2009

एसे सज धज कर कहाँ गये थे आदि?

शनिवार शाम को अच्छे से तैयार हो कर एयरपोर्ट गया.. अरे उसी दिन तो मेरी मम्मी मुंबई से आने वाली थी.. तो पेंट टीशर्ट और सेण्डल पहन कर तैयार हो गया.. और चला एयरपोर्ट की और..


जैसा हमेशा होता है फ्लाइट लेट हो गई.. तो मेरे पास काफी समय था घुमने के लिये.. अब घुमने के लिये साईकिल तो लाया नहीं था तो एयरपोर्ट पर ये गाड़ी मिल गई.. वैसे आप तो इस पर सामान रखते होगें पर मैनें तो इस पर बैठने की जगह का जुगाड़ कर लिया.. इस गाड़ी पर बैठ वेटींग एरिया में बहुत देर घूमा..


घूमते घूमते जब थक गया और बोर हो गया तो इस आरामदायक कुर्सी पर बैठ गये.. घर से खिलौने तो लाये नहीं थे तो पापा के मोबाईल से काम चलाया. म्युजिक बजाया.. और डांस भी किया..


इतना सब करते करते मम्मी भी आ गई..  और में तपाक से मम्मी की गोद में चढ़ गया... और मम्मा को छू कर देखने/महसुस करने लगा..


मम्मी अकेली नहीं आई.. अपने साथ हापुस (अल्फाजों) आम का डिब्बा भी लाई.. अब तो रोज इन मीठे आमों का मजा लेता हूँ..

शरारत ऑफ द डे..
कोई मुझे बहला के एक जगह नहीं बिठा सकता.. कल शाम को ये कोशिश पापा ने की.. मेरा मन बाथरुम में जाकर पानी से खेलने का था और पापा मु्झे बार बार वहाँ से लाकर कूछ और खेलने को दे रहे थे... पापा पकड़ कर बाथरुम से लाते, कुछ खेल खिलाते और जैसे ही उनकी नजर हटती मैं दौडते हुए फिर बाथरुम की और.. चार-पाँच बार एसा करने के बाद उनको पक्का यकिन हो गया मैं एसे नहीं मानने वाला.. तो फिर मुझे बाल्टी और पानी के साथ छोड़ दिया... और मुझे मिला मेरा मन पसन्द खेल  - आदि हर समय थोडे़ न नहाते है बेटा!!! 


Thursday, June 4, 2009

हर ताले की चाबी है मेरे पास...

आजकल नया शौक ने जन्म लिया है... बोतल पर ढक्कन लगाने का, पैन पर केप लगने का और ताले में चाबी लगाने का..  ये मिल जाये तो फिर मैं व्यस्त.... फिर और किसी खिलौनो की जरुरत नहीं.....






मुझे ऐसे व्यस्त कर पापा मम्मी खाना खिला देते हैं.. जो मुँह पर निशान देख रहें है, उसी के है..

शरारत ऑफ द डे
शाम को घर में मन नहीं लगता.. बाहर घुमने जाना होता है... कल शाम भी एसा ही हुआ.. पापा भी तैयार हो गये.. और बाजार जाने के लिये पापा की गोद में सवार हो गया.. अचानक पापा की नजर कंप्युटर पर पड़ी... देखा तो ब्लोग पर मम्मी का कमेंट था.. पापा मुझे गोदी में लेकर कमेंट पढ़ने लगे.. अब ये मुझे मंजूर नहीं था.. और मौका देख पापा का कान चबा गया... अब पापा के पास कोई विकल्प नहीं था... "आदि एसा करते हैं क्या?"

Wednesday, June 3, 2009

कहीं मैं कमजोर तो नहीं हो रहा?

पिछले सप्ताह ही कपिला आंटी और भाटिया अंकल ने चिन्ता जताई कि मैं कहीं कमजोर तो नहीं हो रहा... वैसे पिछले दो महिनों से मेरा वजन भी 9.5 kg पर अटका था, तो पापा मम्मी भी चिन्ता कर रहे थे.. अब चिन्ता करने से तो कुछ होना नहीं था तो आज शाम हम डॉ अंकल के पास गये.. वजन कराने.. और खुशी की बात ये कि मेरा वजन बिल्कुल सामान्य निकला अभी हो गया 10.1 kg.. ये देखिये ग्राफ... बिल्कुल हरी लाइन (सामान्य) के साथ साथ चल रहा है..  अब आप चिन्ता नहीं करना..  और हाँ मेरी लम्बाई भी सामान्य रुप से बढ़ रही है.. लेकिन सिर की परिधी थोड़ी बड़ी है.. ये तो अच्छी बात है न... कहते है न कि सर बड़ा ......... का..


फोटो के साथ तो आप मेरी शरारत रोज देखते हैं... लेकिन कुछ बातें ऐसी होती है जिनका फोटो नहीं होता या फिर बहुत छोटे किस्से होते है...  तो उनको आप तक पहुचाँऐगें एक नये कॉलम "शरारत ऑफ द डे" में.. (दो और नाम सोचे है इसके लिये "आज का पल" और "मुमेंट ऑफ द डे" आप बताइये क्या ठीक रहेगा.. आप कोई और नाम सुझाना चाहें तो स्वागत है..)

शरारत ऑफ द डे

सोमवार रात को सोते हुऐ आदि की नजर ड्रेसींग टेबल के ऊपर छुपा कर रखे टॉफी (पान पसन्द) के डिब्बे पर पड़ी... डिब्बा देख बाबा ने एक अँगुली उस और कि और हूँ हूँ कर टॉफी की मांग करने लगे, रात के ११ बजे उसे ये टॉफी खिलाने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी.. लिहाजा उसे बहलाने और ध्यान बटाने के तरह के उपाय किये.. पर साहेब का जी तो उसी में अटका था.. और कोई उपाय न देख उसे टॉफी देनी पड़ी, और बाबा रात ११ बजे विजयी मुद्रा में टॉफी खुद छिल कर मुँह में ले स्वाद लेने लगे.. टॉफी का रेपर एक हाथ में ले तब तक उसका स्वाद लेते रहे जब तक वो पुरी मुँह में घुल न गई... और टॉफी खत्म कर ही बाबा सोये.. जय हो!!!

Monday, June 1, 2009

चलो अपने काम खुद करो...

जैसा कि आपको बताया कि मम्मी मुंबई गई है, ५-६ दिनों के लिये.. अब मम्मी नहीं है तो अपने काम खुद ही करने पडे़गें न? शुरुआत बाल बनाने से.




कैसे लगी मेरी ये शरारत?

और हाँ इस पोस्ट के साथ मेरी पोस्टस का दोहरा शतक पुरा हुआ... और ताऊ के कमेंटस का सैंकडा़ भी पुरा हुआ..


धन्यवाद ताऊ आपके सतत समर्थन के लिये...

Thursday, May 28, 2009

टमाटर खाओ और गाल टमाटर जैसे लाल लाल कर लो...

कहते है टमाटर खाने से गाल लाल लाल हो जाते है.... तो जम के टमाटर खाया... बड़ा मजा आया...



कैसा लगा?

Sunday, May 24, 2009

तूफान मचा डालो!! हालाकान कर दो सबको..

आदि अपनी मम्मी के साथ दिल्ली में है, और में कन्याकुमारी जिले में २० तारिख को आ गया था अभी ६ दिन और यहीं रुकना है.. कल सुबह अंजु से बात हुई उसी संदर्भ में है ये पोस्ट..

आदि बेटा,
ढेर सारा प्यार,
कल मम्मी का फोन आया था.. और मम्मी तेरी बहुत शिकायत कर रही थी.. मम्मी कह रह थी कि तुम एक मिनिट भी शान्त नहीं बैठते, हर पल नई शरारत करते हो.. पूरे समय उन्हे तुम्हारे पिछे घुमना पड़ता है.. मम्मी कहती है कि अब तुम सीढ़ी चढ़ना सीख गये हो..  जब भी मौका मिलता है सीढ़ी चढने उतरने की कोशिश करते हो..
और मम्मी बता रही थी कि तुम दरवाजे पर जा कर खडे़ हो जाते हो और कुण्डी खोलने की कोशिश करते हो.. बाहर घुमने की जिद करते हो.. बेटा मम्मी को कई काम करने होते है.. तुम्हे हर समय बाहर कैसे ले जा सकती है?
और जब मम्मी बाहर ले जाती है तो तुम प्राम से उतरने की कोशिश करते हो, सड़क पर चलने के लिये मचलते हो.. तुम कंकड पत्थर उठाने लगते हो.. क्यों हैरान करते हो इतना..
उडन तश्तरी अंकल ने तुम्हे दो दिन पहले कहा "तूफान मचा डालो!! हालाकान कर दो सबको.." और तुमने मान भी लिया.. बेटा समीर अंकल मजाक कर रहे थे.. चाहो तो पुछ लो..
वैसे सही बताऊ मैं हर पल तुम्हे बहुत मिस कर रहा हूँ, और मन ही मन मम्मी से बहुत इर्ष्या कर रहा हूँ.. कितने अच्छे पल मिस कर रहा हूँ..:) तुम्हारी बाल लिलाऐं मैं कुछ कम क्यों देख पा रहा हूँ.. पर क्या करें, बाहर तो जाना होता है न... जल्द ही दिल्ली आ रहा हूँ फिर हम खुब मस्ती करेगें... बहुत बाहर घूमने जायेगें.. कबुतर देखेगें.. लिफ्ट के बटन दबायेगें.. साईकल चलायेगें.. और वो सब कुछ जो तुम्हे पसंद है..
बहुत प्यार!!
पापा

Tuesday, May 19, 2009

मेरी पहली किताब

जन्मदिन पर मिले तोहफों की कड़ी में आज बारी है किताब की...  राजीव अंकल एरोप्लेन के साथ एक किताब भी लाये थे.. एरोप्लेन तो अभी नहीं मिला पर किताब पढने के खुब मजे ले रहा हूँ.....
.

शाम को पापा ऑफिस से आते है तो मैं अपनी पढाई शुरु कर देता हूँ.. किताब के पन्ने पलटना, उसमें रंग बिरंगे चित्र देखना मुझे खुब भाता है.. और तो और उसमे कुछ  कार्ड भी है... कार्ड बाहर निकाल उनसे खेलना भी पसंद है..






किताब पर लिखा है कि इससे मैं हाथों और आंखो का सामजस्य सिखुंगा...



और एसा नहीं कि ये एक बार ही पढी़ है...  ये देखिये दुसरे-तीसरे दिन के चित्र भी...









अभी कार्ड पहचाना और जगह पर लगाना नहीं आया है पन्ने अच्छे से बदल लेता हूँ..




और कुछ नहीं तो ये किताब १०-१५ मिनिट तो मुझे एक जगह बैठा सकती है, उससे ज्यादा नहीं.. इतनी पढाई बहुत है न मेरे लिये?

थेंक्यु रा्जीव अंकल!!

Saturday, May 16, 2009

बाल्टी में अब टब है मेरा..मैं मछली सा उसमें तैरा....

शुक्रिया "कविताऐं बुनने के लिये".... और मैने बुना है ये विडियो उसी नहाने की मस्ती का आपकी कविताओं के साथ.... तो देखिये  डेढ मिनिट का ये विडियो..




धन्यवाद आप सभी का..

Friday, May 15, 2009

मिलिये प्यारी आदिती से..

आज मिलाता हूँ मेरी प्यारी दोस्त आदिती से... 

ये देखो आदिती सुन्दर सुन्दर चोटी बना कर आई है और प्यारी सी बिन्दी भी लगा ली है..  


मम्मी को आदिती बहुत पसन्द है... वो इसके लिये फ्राक भी लाने वाली है..


कैसी लगी आपको मेरी नई दोस्त?

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