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Sunday, October 11, 2009

छुक छुक छुक छुक रेल चली....

छुक छुक छुक छुक रेल चली.... आदि जी की रेल चली....

ये नया खेल सिखा है.. दिल्ली में तो मेरी रेल में एक या दो डिब्बे ही जुड़ते थे..पर अब जोधपुर में तो बहुत बड़ी ट्रेन बनती है.... कल शाम मेरे साथ खेलेने के लिये प्रितु दीदी सहित सभी दोस्त आ गये.. और हमने बहुत बड़ी रेल बनाई..

देखे मेरी रेल के कुछ फोटो..






आज ऋषभ भैया का जन्मदिन है.. शाम को पार्टी है.. खुब मौज होगी..



"ऋषभ भैया को जन्मदिन कि शुभकामनाऐं!!"

सुचना

दिपावली मनाने दादा दादी के पास कल जोधपुर आ गया हूँ.. तो दिपावली तक वहीं मस्ती होगी..

Wednesday, September 23, 2009

कुकर की सीटी में म्हारो मन डोले..

बडे़ होने के साथ साथ मेरे खेल भी बदल गये है..और अब खेल मेरी मर्जी से होते है.. आजकल कूकर की सीटी से बहुत लगाव हो गया है.. और जब भी सीटी सुनने की इच्छा होती है तो किचन में पहूँच जाता हूँ.. कुकर कहाँ रखा होता है.. कैसे फिट होता है.. मुझे सब पता है.. और मेरी फरमाइश पूरी करने के लिये मम्मी/पापा कूकर में पानी डाल सीटी बजाते है... तसल्ली से देखिये ये विडियो और देखिये मेरा ये खेल..





कैसा लगा?



शरारत ऑफ द डे
कल शाम को पापा के साथ घूम कर आ रहा था तो लिफ्ट में एक अंकल मिल गये... अंकल अपनी धून में मस्त थे.. जेब से एक क्लोरोमिंट निकाली और खा ली.. मैनें तुरंत अपना विरोध जताया.. अंकल भी समझ गये.. जेब से एक क्लोरोमिंट निकाली और मुझे दे दी.. और मैने बदले में दी एक प्यारी सी स्माईल... दूबारा मत पुछना...

Thursday, August 20, 2009

लागे रज, बधे गज

याद है विभु दीदी और अनिमेष भैया ने कहा था....
"मिट्टी मिल गई तो मानो स्वर्ग मिल गया...कोई खिलौना, कोई दूसरा खेल,मिट्टी की बराबरी नहीं कर सकता ....उसके आगे टिक ही नहीं सकता। इसलिए मिट्टी में खेलने का कोई भी मौका हम छोड़ते ही नहीं हैं। ऊपर से मम्मा-पापा को कहते हुए भी सुन लिया, 'लागे रज,बधे गज' (कहावत राजस्थानी की है, भावार्थ कुछ ये कि मिट्टी लगने से बच्चा अच्छा बढ़ता है....मिट्टी में खेलना बच्चे के शरीर के लिए अच्छा है.....)"
अब मैं चलने लग गया हूँ और समझदार हो गया हूँ (है न?) तो पापा मुझे शाम को पार्क में और झुले पर खेलने के लिये ले जाते हैं..  एसे ही एक दिन शाम को को पापा के साथ गया और मिट्टी में खेलने के मजे लिये..

रेत पर अंगुलियों के निशान बनाये..


निशान फिर से मिटाये..

और खुद ही सुन्दर चित्रकारी का आनन्द लिया..

और खुब रेत उडाई..... धम.. धम्म..

एक और बात जो फोटो में नहीं आ पाई.. वो ये कि बीच में पापा की नजर से बच कर दो बार अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाई.. (आपको जानना है तो इमेल करें.. गुप्त नुस्खा है).. और अपने दातों की मजबुती को भी परखा..   बिल्कुल खरे दांत है मेरे..:)

पसंद आया!!



(शिर्षक विभु दीदी के ब्लोग से साभार)

Friday, August 14, 2009

टेलिफोन का पुनः आविष्कार

वैसे तो टेलिफोन का आविष्कार बहुत पहले ही ’बेल’ अंकल ने कर दिया था.. पर एक दिन मैने और पापा ने इसे फिर से ट्राई किया.. सोचा क्या ये वाकई काम करता है.. हुआ यूँ कि एक दिन शाम को पापा पाईप से पानी भर रहे थे... और जो चीज पापा मम्मी के पास हो तो वो तो मुझे चाहिये ही.. तो मैं पाइप का एक सिरा पकड़ रवाना हो गया.. और पापा दुसरे तो पकड़ मेरे पीछे पीछे.. और इसे खेलते खेलते हमने टेलिफोन भी ट्राई कर डाला..


आप भी देखिये हमारा टेलिफोन वाला खेल

हेलो, हेलो, पापा, पापा क्या आपको मेरी आवाज आ रही है... 

आई न.. 

हाँ मैं भी आपको सुन पा रहा हूँ...

हाँ इस कान में भी आवाज आ रही है..

आप बोलो.. मैं सुन पा रहा हूँ..

एसे हमारा खेल चलता रहा.. मैं पाईप लेकर आगे आगे और पापा मेरे पीछे पीछे..
कैसा लगा हमारा ये खेल..



आज जोधपुर से मेरे दादा आये है.. मेरे साथ खेलने.. मेरे लिये कान्हा कि ड्रेस भी लाये है... कान्हा कि ड्रेस क्यों.. अरे भाई आज जनमाष्टमी है.. और मैं भी तो कान्हा बनुंगा..

आप सभी तो जनमाष्टमी की शुभकामनाऐं

Sunday, August 2, 2009

आदि बॉल पास करो..

बॉल से खेलना मुझे सबसे अच्छा लगता है... और पता है मेरे पास कितनी बॉल है.. ढेर सारी.. देखे ये विडियो मैं कैसे पापा से साथ बॉल से खेल रहा हूँ..



आप सभी को मित्रता दिवस की शुभकामनाऐं!!

कैसा लगा?

Wednesday, July 29, 2009

ट्रेन की पटरी क्यों उखाड़ रहे हो भाई!!

नैनो के साथ मेरे लिये एक ट्रेन भी आई थी.. अंकल ने विशेष सिफारिश की भी पापा से..  उनका कहना था "आदि जुडे़ हुए डिब्बे और चलती ट्रेन देख बहुत खुश होगा.." एसी सिफारिश के बाद पापा को ट्रेन लानी ही थी..
  
छोटे छोटे डिब्बे चलते देख पहले तो मैं बहुत खुश हुआ.. फिर इच्छा हुई की उठा कर देखुँ..

तो इंजन तो साइड कर एक डिब्बा उठा लिया.. चलती ट्रेन से..

फिर खेल शुरु हो गया.. पापा ट्रेन चलाते और मैं डिब्बे उठाता...

और इस बार तो बड़ा हाथ मारा.. इंजन उठा लिया..


एसे ही खेल चल रहा था.. पर ’you know i want something more'

तो इसलिये हमने पटरी ही उखाड़ दी..



पटरी उखाड़ कर जी नहीं भरा.. तो उसकी माला बना डाली..


हा हा हा..

पसंद आई ये शरारत..

Saturday, July 25, 2009

चेयर + मोबाइल + आदि = खेल

खेलने के लिये नये खिलौनो और नये आईडिया चाहिये होते है.. और ये सब मुझे ही इज़ाद करने पड़ते है..
ये देखो एक चेयर और एक मोबाइल.. और चेयर को पकड़ने के लिये बनी जगह.. और मेरा खेल शुरु...

जगह का मुआयना तो हो गया.. अब लाता हूँ मोबाइल... नजर ’मछली की आँख’ पर


ये गया मोबाइल...
और ये देखो.. बिल्कुल अच्छे से पहुँचा दिया..

और धड़ाम.. मोबाइल.. उस पार..
तालियाँ, तालियाँ, तालियाँ!!

कैसा लगा..


Sunday, July 19, 2009

आँखों में क्या जी?

मम्मी के साथ कुछ दिन पहले लखनऊ गया था.. होटल के कमरे में एक अलमारी रखी थी.. बिल्कुल मेरे साईज की.. छुपम छुपाई खेलने के लिये एकदम उपयुक्त.. तो फिर मौका भी था और साधन भी.. खेल शुरु..
इन चित्रों में मेरी आँखे और चहरे के भाव पढियें..








कैसा लगा?


Friday, July 17, 2009

मोबाईलीय नृत्य

एक डांस आपने देखा था जब में आठ महीने का था और चल नहीं सकता था.. आज एक और डांस लेकर आया हूँ .. अब मैं चल भी सकता हूँ.. और खुद म्युजिक भी चुन सकता हूँ.. हाँ मोबाईल कि रिंग टोन से.. तो देखिये ये "मोबाईलीय नृत्य"



कैसा लगा मेरा डांस!!

Thursday, July 16, 2009

आँख मिचौनी - दादी के साथ

दादी के साथ आँख मिचौनी का खेल... ये तस्विरें खुद कहेंगी पुरी कहानी..











पसंद आया?

Wednesday, July 15, 2009

कानिया मानिया कुर्र.....

पता है दादी दिल्ली आई थी.. हाँ पिछले बुधवार (८ जुलाई)  को पापा बहुत दिनों बाद दिल्ली आये और उसी दिन मम्मी को भी बाहर जाना था.. पापा बड़ी असमंझस कि स्थिति में थे.. कुछ नहीं सुझा तो तुरंत दादी को फोन लगाया और  और दादी शाम की ट्रेन में बैठ गुरुवार कि सुबह दिल्ली आ गई.. है न मेरी दादी प्यारी..
धीरे धीरे दादी से दोस्ती भी हो गई और कल शाम दादी के वापस जाने से पहले उनके साथ खुब मस्ती की..

दादी के साथ कानिया मानिया कुर्र वाला खेल खेला...दादी मेरे कान के पास आकर जोर से कुर्रर किया और मैने इस गुदगिदी का खुब मजा लिया.. और तुरंत दुसरा कान आगे कर दिया..






बडा़ मजा आया दादी के साथ खेल कर.. इसके बाद एक और खेल भी खेला.. वो बताऊगां कल..

मजा आया.. गुदगुदी हुई!!

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