Saturday, July 25, 2009

चेयर + मोबाइल + आदि = खेल

खेलने के लिये नये खिलौनो और नये आईडिया चाहिये होते है.. और ये सब मुझे ही इज़ाद करने पड़ते है..
ये देखो एक चेयर और एक मोबाइल.. और चेयर को पकड़ने के लिये बनी जगह.. और मेरा खेल शुरु...

जगह का मुआयना तो हो गया.. अब लाता हूँ मोबाइल... नजर ’मछली की आँख’ पर


ये गया मोबाइल...
और ये देखो.. बिल्कुल अच्छे से पहुँचा दिया..

और धड़ाम.. मोबाइल.. उस पार..
तालियाँ, तालियाँ, तालियाँ!!

कैसा लगा..


19 comments:

  1. भले आदमी, मोबाइल को तोड़ने पर क्यों आमादा है किसी और चीज को ही पार करले !

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  2. लगता है पक्का खिलाडी है..

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  3. क्या विवेक अंकल..

    आप ही ने तो कहा था

    "खिलौना मँहगा हो या सस्ता, एक ही दिन में हो खस्ता"

    अब मेरे लिये तो ये भी खिलौना ही है न??

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  4. " ha ha ha ha ha ha good job hero"

    love ya

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  5. अच्छा हमारा हथियार हमीं पर चला रहे हो ?

    ठीक है,ठीक है,

    अब झगड़ो मत,

    हम जीते, तुम हारे, झगड़ा खत्म !

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  6. aare waah aadi tho bahut hoshiyaar hai,naye naye games khelta hai waah,khursi bahut bhaa gayi humko cuti master:)

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  7. चेयरमैन बनो! जिसका काम चेयर पर बैठना, साइन करना और मोबाइल पर ड़ांटना भर होता है! :)

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  8. bahut khub aadi bhai lage raho |

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  9. chalo isi bahane aadi kuch der ke lie busy rahegaaaaa. mom to yahi soch rahi hongi...

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  10. कुर्सी-मोबाईल वाले खेल से बोर हो जाओ तो एक बढिया गेम मैं बताता हूं, अब कुर्सी की जगह पीछे वाली खिड़की हो सकती है। एक बार खिड़की से मोबाईल को नीचे डाल कर देखो कितना मजा आयेगा.... और हां ये बंद वाला डमी मोबाइअल नहीं पापा या मम्मी का मोबाईल डाल कर देखना ।
    :)

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  11. हैल्लो आदि!
    भाई मिस-कॉल क्यों दे रहे हो?
    बात करो ना।

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  12. अरे आदि तुमने तो मेरा नम्बर ही मिला दिया हेलो कैसे हो कल तुम्हारी जलेबियां नहीं खा पायी चलो फिर बाई आशीर्वाद्

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  13. अरे आदि तुमने तो मेरा नम्बर ही मिला दिया हेलो कैसे हो कल तुम्हारी जलेबियां नहीं खा पायी चलो फिर बाई आशीर्वाद्

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  14. जमीन पर पटको, तब तो टूटेगा. इस तरफ से डालकर गिराओ... :)


    क्या मस्ती चल रही है.

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  15. आजकल हम भी इसी तरह की उठापटक कर रहे हैं। लगे रहो।

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  16. बेटा कभी मौका मिले तो बालकनी के छेद से भी नीचे निकलना मोबइल

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  17. बहुत अच्छे..लगे रहो यार.

    रामराम.

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  18. ठीक ही तो है खिलौना सस्ता हो महंगा और मोबाइल हो या कुछ और तेरे लिए तो खिलौना ही है उसे बचाने की जिम्मेदारी तेरी थोड़े ही है तू तो खेलता जा जिसे बचानी हो वो चिंता करे |

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कैसी लगी आपको आदि की बातें ? जरुर बतायें

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