अब तो गुब्बारे मेरे प्रिय हो चुके थे.. कोई दूर नहीं कर सकता.. जल्दी से दे दो पापा..
हम तैयार हो कर कंपाउड में पहुँचे.. और झण्डा फहराया.. "जय हिन्द"
और इसके बाद मिला लड्डु.. अंकल मेरे तक आने में देर लगा रहे थे.. मैने तो खुद ही ले लिया.. आजादी का स्वाद बहुत मिठा है..
और फिर मम्मी की गोद में सवार हो कर सभी लोगो को देखता रहा.... वहाँ बहुत सारे गेम्स भी हुऐ..
देखो कितने लोग आये थे.. और बारिश की फुहारों में आजादी का आनन्द ले रहे थे..
पसन्द आई ये पोस्ट...
| सुचना दादा कल शाम वापिस जोधपुर चले गये.. पर तीन दिन तक मैने दादा के साथ खुब मस्ती की.. जल्द ही वो सभी पोस्ट लेकर आने वाला हुँ.. |
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अच्छा आपने कान्हा वाली पोस्ट देखी? नहीं तो यहाँ देख सकते हैं..