ट्रेन का सफ़र अच्छा रहा... थोड़ी देर मुझे माहौल समझने में लगती है... तो पापा के कन्धे पर झुला... फिर तो अपने pram में मजे से सो गया.. और सुबह घर पहुँच कर ही उठा.. सुबह तो फुल मस्ती में था.. और होऊगां भी क्यों नहीं... इतने दिनों से घुम कर आया था.. और पलटूराम बन पलट कर मजे ले रहा था.. सीधे से उल्टा, फिर उल्टे से सीधा.. और इतनी मस्ती आयेगी ही...आज मेरी मम्मी का जन्म दिन है.. वैसे तो हमने तो कल ही दादा, दादी और नानी के साथ मना लिया.. पर आज भी होगा न?
हैप्पी बर्थडे मम्मी..