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Monday, September 8, 2008

जब मैं बहुत बीमार हो गया था

पता है, जब मैं छोटा था तो बहुत बीमार हो गया था. कमला नगर अस्पताल में जन्म के 5 दिनों के बाद मैं नानी के घर गया.वहाँ मुझे नाना,मामा-मामी, मासी सभी मिले. उन्होंने मेरे आने की पूरी तैयारी कर रखी थी.
नई जगह आकर मैं खुश था.कुछ समय तक तो मैं ठीक रहा पर रात में मुझे तेज़ बुखार आ गया. मम्मी रात-भर मेरे माथे पर गिली पट्टी रख बुखार कम करने की कोशिश करती रही पर बुखार तो कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था और मैं धीरे-धीरे सुस्त होता जा रहा था. पता है, मेरी आँखें भी नहीं खुल पा रही थी.
जैसे-तैसे सुबह हुई पर मेरी हालत में कोई परिवर्तन नहीं हुआ.. पापा सुबह ही नानी के घर आ गये और मुझे डॉ. राज धारिवाल के पास ले गये.. डॉ अंकल मे मेरी अच्छी तरह से जाँच की और कहा कि मुझे septicemia है. उन्होंने मेरे खून की जाँच की और मुझे इंजेक्शन लगा कर घर भेज दिया..
septicemia का नाम सुन कर पापा चौकन्ने हो गये, उन्होंने प्रकाश अंकल से बात की और तय किया कि मुझे एक और डॉक्टर के पास ले जायेंगे. पता है, मेरा वज़न भी कम हो गया था..
शाम को पापा और नानी मुझे लेकर डॉ अनुराग सिंह के पास गये.. डॉ अंकल का अस्पताल (सरोज अस्पताल) नानी के घर से बहुत दूर था. फिर भी जाना तो था ही ना.
इस डॉ. अंकल ने भी septicemia का ही संदेह जताया और मुझे admit करने की सलाह दी. पापा को भी यही ठीक लग रहा था.. और मैं एक अस्पताल से निकल कर दूसरे में भर्ती हो गया :( . मुझे पहली मंज़िल पर एक कमरा दे दिया गया. थोड़ी देर बाद पापा मम्मी को भी अस्पताल ले आये, पर मम्मी सीढ़ी नहीं चढ़ पा रही थी और अस्पताल में लिफ़्ट तो थी नहीं! तो समस्या हुई कि मम्मी को मेरे पास कैसे ले जाएं? . फिर मम्मी को स्ट्रेचर पर उठा कर मेरे पास लाया गया.
मुझे drip लगा कर मम्मी के पास लिटा दिया.. हाँ! एक बात और यहाँ रोज़-रोज़ सुई नहीं लगती थी.. पता है क्यों? क्योंकि उन्होंने मेरे हाथ में स्थाई रुप से एक स्टैंड लगा दिया.. अब हर इन्जेक्शन इससे ही लगता था..
मैं अस्पताल में 4 दिनों तक रहा.. दिन में दादी मेरे पास रहती थी, तो रात में नानी.. मम्मी-पापा तो पूरे समय अस्पताल में ही रहे. गुड़िया बुआ भी मुझे देखने आती थी...
मुझे सुबह शाम इंजेक्शन लग रहे थे और मैं धीरे-धीरे ठीक हो रहा था.. पहले दो दिन तक तो डॉ. कहते रहे रहे थे कि मेरी condition stable है.. तीसरे दिन शाम को उन्होंने कि "he is out of danger..." यह सुनने को मम्मी-पापा तीन दिनों से इन्तजार कर रहे थे..
अगले दिन अस्पताल से मेरी छुट्टी हो गई.. डॉ. अंकल ने कहा कि कुछ इंजेक्शन घर पर ही लगवा देना..

मेरे चेहरे की मुस्कान फिर से लौट आई... thank you डॉ. अंकल, thank you प्रकाश अंकल..
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