बिना सहारे चलने कि ब्रेकिंग न्युज सुन ताऊ ने इच्छा जाहिर की विडियो देखने कि.. तो खास ताऊ कि फरमाइश पर पेश है मेरे पहले कदमों का ये ३० सेकण्ड का विडियो
तो ताऊ अब तो मुझे ’पल्टु’ नहीं कहोगे न?
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Monday, May 18, 2009
Thursday, March 12, 2009
एक रंगीन पोस्ट
मेरी पहली होली...
कल होली थी, मेरी पहली होली.. एक रंगीन त्यौहार के लिये एक रंगीन पोस्ट.. थोड़ी बाते और ढेर सारा कलर..
सुबह ११ बजे नास्ता कर होली खेलने के लिये तैयार हो गया... और तब तक पापा ने गुलाल से थाली सजा दी.. पता है पापा के साथ जोधपुर से चार्मी भुआ भी आई थी मेरे साथ होली खेलने के लिये..
शुरुआत पापा ने मुझे गुलाल लगा कर की.. फिर सब एक दुसरे गुलाल लगा कर होली खेलने निकल पडे़.. लिफ्ट में एक और आदि मिल गया, उन्हे भी गुलाल लगा कर आंटी के घर चल दिये..
वहां गये तो पता चला वो सब मेरा ही इंतजार कर रहे थे.. जम कर एक दुसरे तो गुलाल लगाया मिठाई खाई..
अरे ये विक्की भैया को देखो, वैसे तो मौका नहीं मिला लेकिन मैं गोद में था तो चुपके से भाभी के कैसे गुलाल लगा दिया..
आंटी के घर होली का धमाल मचा कर पहुवें पिंकु चाचा के घर.. चाचा घात लगाये हमारा ही इंतजार कर रहे थे.. जैसे ही दरवाजा खुला पानी की एक भरी बाल्टी हमारे ऊपर गिरी.. मैं सबसे आगे पापा की गोद में था तो इसके लपेटे में मैं भी आ गया.. अचानक हुऐ इस हमले से चौंक गया और थोड़ी देर बाद मामला समझ आया.. ऐसे खेलते है होली..
सुबह ११ बजे नास्ता कर होली खेलने के लिये तैयार हो गया... और तब तक पापा ने गुलाल से थाली सजा दी.. पता है पापा के साथ जोधपुर से चार्मी भुआ भी आई थी मेरे साथ होली खेलने के लिये..
शुरुआत पापा ने मुझे गुलाल लगा कर की.. फिर सब एक दुसरे गुलाल लगा कर होली खेलने निकल पडे़.. लिफ्ट में एक और आदि मिल गया, उन्हे भी गुलाल लगा कर आंटी के घर चल दिये..
हैप्पी होली पापा
ये भी आदि है,
वहां गये तो पता चला वो सब मेरा ही इंतजार कर रहे थे.. जम कर एक दुसरे तो गुलाल लगाया मिठाई खाई..
कोई पहचान नहीं आ रहा, ये सब कौन नये लोग है?
अरे ये विक्की भैया को देखो, वैसे तो मौका नहीं मिला लेकिन मैं गोद में था तो चुपके से भाभी के कैसे गुलाल लगा दिया..
आंटी के घर होली का धमाल मचा कर पहुवें पिंकु चाचा के घर.. चाचा घात लगाये हमारा ही इंतजार कर रहे थे.. जैसे ही दरवाजा खुला पानी की एक भरी बाल्टी हमारे ऊपर गिरी.. मैं सबसे आगे पापा की गोद में था तो इसके लपेटे में मैं भी आ गया.. अचानक हुऐ इस हमले से चौंक गया और थोड़ी देर बाद मामला समझ आया.. ऐसे खेलते है होली..
रंग और गुलाल में सने हम सब..
पहचान रहे हो? कैसा था घर से चला जब और कैसा हो गया..
गुलाल लगाया, मस्ती की पर होली की मिठाई भी खाने को मिली... और होली के दिन तो रंग वाली मिठाई खा सकते हैं न?
कैसी रही आपकी होली?
Monday, March 9, 2009
दिल्ली मेट्रो में आपका स्वागत है!!
4 March 2009
घर के पास ही मेट्रो स्टेशन है, एक नहीं दो-दो.. गलियारे और बालकानी में खडें हो तो "मेट्रो रानी" सर्राटे से भागती दिखती है.. पर मुझे मेट्रो में घूमाने अब तक कोई नहीं ले गया...:)
पुखराज भैया कि बहुत इच्छा थी मेट्रो में बैठने की, दिल्ली आये और मेट्रो में नहीं बैठे, क्या कहेगें गाँव में जाकर!! उनके गाँव जाने का समय करीब आ रहा था, पर पापा इन दिनों अक्सर टूर पर रहते है और वक्त ही नहीं निकाल पा रहे थे.... आखिर जब 4 मार्च को पापा कन्याकुमारी गये हुये थे तो हमें मेट्रो घूमाने का जिम्मा मम्मी ने उठाया.. मम्मी मुझे और पुखराज भैया को साईकल रिक्शा पर ले द्वारका सेक्टर १२ मेट्रो स्टेशन पर गई, मैं तो साइकल रिक्शा पर पहली बार ही सवारी कर रहा था, और ज्यादा जानता नहीं हूँ, आपको ज्यादा जानकारी ज्ञान अंकल यहां दे रहे हैं..
साईकल रिक्शा की सवारी के बाद हम मेट्रो स्टेशन पहूँचे, मम्मी ने केवल पुखराज भैया का टिकट लिया, मैं तीन फीट से छोटा हूँ इसलिये फ्री..
बहुत मुश्किल से जगह मिलती है बैठने को, खैर पैसे गिन लूँ, वापसी का टिकट तो दिलाना है न?
मेट्रो की पहली यात्रा द्वारका स्टेशन पर जाकर खत्म हुई....
-:खुशखबरी:-
घर के पास ही मेट्रो स्टेशन है, एक नहीं दो-दो.. गलियारे और बालकानी में खडें हो तो "मेट्रो रानी" सर्राटे से भागती दिखती है.. पर मुझे मेट्रो में घूमाने अब तक कोई नहीं ले गया...:)
पुखराज भैया कि बहुत इच्छा थी मेट्रो में बैठने की, दिल्ली आये और मेट्रो में नहीं बैठे, क्या कहेगें गाँव में जाकर!! उनके गाँव जाने का समय करीब आ रहा था, पर पापा इन दिनों अक्सर टूर पर रहते है और वक्त ही नहीं निकाल पा रहे थे.... आखिर जब 4 मार्च को पापा कन्याकुमारी गये हुये थे तो हमें मेट्रो घूमाने का जिम्मा मम्मी ने उठाया.. मम्मी मुझे और पुखराज भैया को साईकल रिक्शा पर ले द्वारका सेक्टर १२ मेट्रो स्टेशन पर गई, मैं तो साइकल रिक्शा पर पहली बार ही सवारी कर रहा था, और ज्यादा जानता नहीं हूँ, आपको ज्यादा जानकारी ज्ञान अंकल यहां दे रहे हैं..
साईकल रिक्शा की सवारी के बाद हम मेट्रो स्टेशन पहूँचे, मम्मी ने केवल पुखराज भैया का टिकट लिया, मैं तीन फीट से छोटा हूँ इसलिये फ्री..
मम्मी ट्रेन अब आयेगी?
कौन तेज होर्न बजाता है, मुकाबला मेट्रो से..
बहुत मुश्किल से जगह मिलती है बैठने को, खैर पैसे गिन लूँ, वापसी का टिकट तो दिलाना है न?
मेट्रो की पहली यात्रा द्वारका स्टेशन पर जाकर खत्म हुई....
-:खुशखबरी:-
स्कोर बोर्ड की गड़बडी से जरा देर से पता चला की समीर अंकल मेरे ब्लोग पर कमेंट्स का सैकड़ा लगा चुके है, शानदार १०७ कमेंट्स के साथ...
तालियां
और सीमा आंटी बस एक टिप्पणी दूर है शतक से....
दोनों को बहुत धन्यवाद!!!
THANK YOU SAMEER UNCLE!!!
THANK YOU SEEMA AUNTY!!!!!!
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