Tuesday, May 12, 2009

कभी फिसलें हैं....

कभी फिसलें है आप फिसलपट्टी पर.. बड़ी मजेदार होती है ये... जब दादा दिल्ली आये थे तो मु्झे शाम को घुमाने ले जाते थे और फिसलपट्टी पर भी खेलने देते थे... दादा जब आकर पापा को बताते तो पापा नहीं समझ पाते की ये नन्ही जान कैसे फिसलपट्टी पर खेल सकती है... शायद ऐसे ही दूर से दिखा कर लाये होगें...

शनिवार की देर शाम पापा भी पहुँच गये मुझे फिसलपट्टी पर फिसलाने के लिये... मुझे  पट्टी पर खेलता देख आश्चर्य करने लगे... तुरंत मम्मी को फोन कर बोला.."बालकॉनी से देखो, आदि फिसलपट्टी पर कितना अच्छा खेल रहा है..." बालकॉनी से मुझे फिसलता देख मम्मी से नहीं रहा गया और केमरा ले नीचे आ गई..... और इन खुबसुरत पलों को कैद कर लिया खास आपके लिये...


हैण्डल को मजबुती से पकड़ धीरे धीरे नीचे आने की कौशिश...

फिसलने के बाद फिर से ऊपर जाना होता है....
अच्छे से बैठ कर फिर नीचे जाने की तैयारी...
खुद ही दम लगा कर ऊपर जाने कौशिश... 
बहुत मजा आया...
याद आया बचपन? कभी फिसले है ऐसे? 

11 comments:

  1. गजब ताकत आ गई है बाबू!! खूब अच्छे...संभल कर फिसलना..खूब मजे में.

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  2. छा गये पल्टूजी आप तो. क्या मजा आता है यार इसमे तो. बहुत बीता जमाना याद करवा दिया. हमारे जमाने मे तो ये भी नही थी कोई बडे से चिकने पत्थर पर फ़िसल कर ही खुश हो लेते थे भाई.

    एक बार मेरे नाम से भी फ़िसल लेना आज. मुझे तो देख कर ही मजा आरहा है.

    रामराम.

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  3. फिसलने का आनन्द अदभुत है । खूब फिसल रहे हैं आप ।

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  4. हा हा हा हा हा हा हा ओये हीरो सच मे बचपन याद दिला दिया.......बहुत मजे कर रहे हो .....है न..

    love ya

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  5. फिसले तो हम भी है यार कहीं.. पर वो फिसल पट्टी नहीं थी... :)

    जोधपुर में शास्त्री सर्किल पर बनी पत्तियों पर खूब फिसले है हम..

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  6. हमारे ज़माने में ये फिसलपट्टियाँ तो होती नहीं थी हाँ रेत के बड़े टील्ले जरुर होते थे हम तो उन टिल्लों पर ही फिसला करते थे | रेत में फिसलने का भी अलग मजा आता था |

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  7. खूब फिसले है....हमारे छोटू रोज स्कूल से आते वक़्त दो मिनट रूककर फिसलते है...पापा लेने जाते है ...एक दो बार उनके किसी काम में बिजी होने के कारण मै गया तो पापा ने हिदायत दी....दो तीन बार फिसलने देना....जल्दबाजी मत करना...दादा -पोते की बोन्डिंग में अपुन कौन ?

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  8. अब तो अपने बेटे को फि‍सला रहा हूँ:)

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  9. sach kaha yaad aa gaya bachpan ..samhal kar fislana babu.

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कैसी लगी आपको आदि की बातें ? जरुर बतायें

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