Tuesday, August 18, 2009

दादा मेरे बाल बना दो..

वैसे मेरे बाल बनाना कोई आसान काम नहीं है.. कम से कम तीन कंघे तो चाहिये ही..  वो इसलिये कि दो तो मेरे दोनों हाथों में खेलने के लिये.. और एक से आप बाल बनाओ..
जनमाष्टमी की सुबह जब नहा कर आया तो दादा ने सोचा कि आज आदि की चोटी बनाते हैं..  तो मैने भी सोचा चलो आज दादा तो ट्राई करने देते है और शराफत से बाल बनवाने लगा.. और तो और कंघा भी खुद ही दादा को दे दिया..
और दादा मेरे बाल बनाने लग गये..
चारों और से घूम घूम कर बाल बनवाये.. मैनें.
थोड़ा आगे से भी दादा..
एक ’पोनी’ बना दो मेरी,,
बस.. अब मैं भाग रहा हूँ...
पसंद आया दादा पोते का ये खेल!!




16 comments:

  1. क्या आनन्दमय दृश्य हैं! वाह!

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  2. दादा भी खुश और पोता भी...ये ख़ुशी दादा बने बिना महसूस नहीं की जा सकती...
    नीरज

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  3. दादा के सामने कोई भी बच्चा शरारत कम ही करता है इसीलिए तुमने भी बाल आराम से बनवा लिए |

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  4. dadaji ke saath aadi waah,bahut khush lag rahe hai dono bhi,ye pyar yuhi barkaraar rahe.

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  5. aadi bhai dada aur nai ,so good expresion

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  6. मेरे पापा से सब डर के मारे बात नहीं करते लेकिन मेरी बेटी को सभी अधिकार है कुछ भी करने का
    बेटा मूल से सूद प्यारा होता है

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  7. तो दादा ने खूब दुलार किया आपका... मैं भी नेक्स्ट मंथ जा रही हूँ अपने दादा दादी से मिलने.... फिर मैं भी बताउंगी सारी बातें :-)

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  8. दुलार और कंघी एक साथ! वाह!

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  9. हम तो बाढ़ से परेशान हैं,
    मगर आदि बेटा को
    बधाई तो दे ही देते हैं।

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  10. वाह आदि आनंदम आनंदम.

    रामराम.

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  11. आदि,‍ कभी मत भूलना कि‍ तुम्‍हारे सुंदर बालों को कब-कब कि‍सने संवारा। ऐसे ही छूने भर से संवर जाती है जिंदगी भी। है ना!

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  12. बहुत अच्छा प्रयास

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  13. Wahhhe Aditya Bhaiya...ye hui na acchhhon bachhon wali bat.

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  14. बहुत सुंदर तस्वीरें! मुझे तो अपने दादाजी की याद आ गई!
    मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है -
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

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  15. गजब!! दादा तो गदगदायमान होंगे..जिओ मेरे लाल!!

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  16. ओये हीरो ये दादा पोते का खेल मजेदार लगा....बहुत मजा आया सच आदि...

    love ya

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कैसी लगी आपको आदि की बातें ? जरुर बतायें

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